
“टी डे की तरह ही गन्ना दिवस भी घोषित किया जाए” Publish Date : 30/05/2026
“टी डे की तरह ही गन्ना दिवस भी घोषित किया जाए”
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 निधि सिंह
गन्ना किसानों का सम्मान, देश की शान
सुबह की पहली मुस्कान है चाय, थके दिल की पहचान है चाय। कुल्हड़ की मिट्टी से महक उठे, अदरक, इलायची, जान है चाय।
नींबू की खटास हो या गुड़ की मिठास, काली हो या ग्रीन टी का एहसास, हर प्याली में छिपी कहानी, हर घूंट में प्रेम, मधुर विश्वास।
जहां पहले मट्ठा मिलता था, अब वहां भी चाय का रिवाज है, गाँव-गाँव, शहर-शहर में देखो, चाय ही तो अपनापन का अंदाज़ है।
राजनीति में भी सुर्खियाँ बनी चाय, ‘‘चाय वाला प्रधानमंत्री” कहलाए, ट्रेन में चाय बेचने वाला वो बालक, आज देश का नेतृत्व करने आए।

दोस्तों की महफ़िल हो या दफ्तर की बात,
एक कप चाय जोड़ दे दिलों की सौगात।
शाहजहांपुर की खिरनी बाग में, ‘‘पप्पी की चाय” मशहूर है, हर जिले, हर राज्य की अपनी चाय, अपनी खुशबू, अपना नूर है।
चाय पिएँ, पर सेहत का ध्यान रखें, स्वाद के संग संतुलन का मान रखें।
आओ इस इंटरनेशनल टी डे पर रिश्तों में मिठास घोले, एक कप चाय के संग मिलकर
प्यार और अपनापन बोले।
चाय की हर चुस्की में छिपी है अपनापन की मिठास
21 मई इंटरनेशनल टी डे
चाय की मिठास का मुख्य स्रोत है गन्ना
गन्ना - मिठास की जड़, शाहजहांपुर का बड़ा योगदान
चाय की मिठास का मुख्य स्रोत है गन्ना, शाहजहांपुर का इस उत्पादन में है गहना।
कहते हैं आदि काल से इसकी कहानी, राजा त्रिशंकु की लार से हुई उत्पत्ति पुरानी।
कांस, नरकुल सहित अनेक किस्मों के, निषेचन और संकरण से बने नये रूप रस्मों के।
1912 में शाहजहांपुर की धरती पर, गन्ना शोध परिषद की हुई स्थापना कर।
तब से अब तक लगभग 250 किस्में, विकसित कर दी वैज्ञानिकों ने यहां किस्में ।
कोयंबटूर में भी गन्ना प्रजनन संस्थान बना, पर 114 साल के बाद भी गन्ना दिवस नहीं बन सका।
हमारा केंद्र व प्रदेश सरकार से विनम्र आग्रह है, टी डे की तरह गन्ना दिवस भी घोषित किया जाना चाहिए।
जैसे योग दिवस से दुनिया में पहचान बनी,
वैसे ही गन्ना दिवस से किसानों की शान बढ़ेगी सभी।
गन्ना संस्थानों, विशेषज्ञों से विचार कर, भारत में भी गन्ना दिवस की घोषणा कर।
किसानों के परिश्रम को मिले सम्मान, मिठास फैलाए गन्ना भारत की पहचान।
आओ मिलकर मांग करें - “गन्ना दिवस”घोषित हो देश में, किसानों की मेहनत का सम्मान हो, हर दिशा में संदेश हो।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
