
गर्मी से सुरक्षित रहना है तो परिवर्तन के लिए पहल है जरूरी Publish Date : 26/05/2026
गर्मी से सुरक्षित रहना है तो परिवर्तन के लिए पहल है जरूरी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
नौतपा के कारण आगामी दिनों में भीषण गर्मी और अधिक परेशान कर सकती है। 31 मई के बाद ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी प्रकार से प्रदेश में लू का कहर अभी कुछ दिन और राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दिन में तपिश रहेगी तो रातें भी अधिक गर्म होंगी।
मौसम विभाग ने कुछ जिलों में लू के लिए रेड अलर्ट जारी करने के साथ ही दिन के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम व आपदा को लेकर लाउडस्पीकर से भी अलर्ट जारी किया जाए। उन्होंने राज्य में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित व जनकेंद्रित बनाने के निर्देश जारी किए हैं।

पल पल बदलता मौसम हमें डरा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही भीषण गर्मी और बाढ़ जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इससे निपटने के लिए चाहे पौधारोपण किया जाए और जल संरक्षण के लिए भी उचित कदम हमें उठाने ही होंगे। सोसाइटी ऑफ़ ग्रीन वर्ड फोर सस्टेनेबल एनवायरनमेंट के सेक्रेटरी डॉक्टर आर. एस. सेंगर ने कहा कि इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए हमें लोगों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाने होंगे नहीं तो इस जलवायु परिवर्तन से आने वाले दशकों में हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रभाव पड़ेगा। यह केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पूरी श्रृंखला प्रकृति और मानव समाज को बदलकर रख देगी। आगामी दिनों में यदि अलनीनो की स्थिति और मजबूत होती है तो इसका असर भारत पर भी मुख्य रूप से पड़ेगा।
इस कारण भीषण गर्मी हिट वेव की आवृत्ति अधिक तीव्रता से बढ़ेगी, साथ ही अत्यधिक वर्षा और सूखे के साथ कुछ क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ की संभावनाएं भी बढ़ेगी तो कुछ क्षेत्रों में सूखे का सामना करना पड़ेगा।
डॉ आर. एस. सेंगर ने बताया कि यदि यही हाल रहा तो फसलों की पैदावार में कमी, तापमान में बदलाव और अनियमित मानसून के कारण धान, गेहूं, मक्का, गन्ना जैसी फसलों के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना बनेगी। यही नहीं, जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर पिघलेंगे, जिससे नदियों में बाढ़ आएगी। वहीं नदियां भविष्य में सूख भी सकती हैं और केवल बरसाती नदी बनकर रह जाएगी। इसके चलते भविष्य के जल संकट और गहरा हो सकता है। साथ ही, जैव विविधता पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

डॉ आर. एस. सेंगर ने कहा कि अभी समय है कि हमें यदि इस संकट से बचना है तो स्वयं जागरूक होना पड़ेगा, फिर चाहे वह पौधों या जल संरक्षण हमें भी अपनी भूमिका निर्धारित करनी होगी, साथ ही विश्व को एक मंच पर आकर जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी भूमिका, कड़े कानूनों को बनाकर उनके साथ निभानी होगी। यदि समय पर ऐसा नहीं किया गया तो निश्चित रूप से भविष्य की स्थिति और भी डरावनी हो सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
