स्वदेशी से ही समृद्धि सम्भव      Publish Date : 22/05/2026

          स्वदेशी से ही समृद्धि सम्भव

                                                                                                                  प्रो0 आर. एस. सेंगर

स्वतंत्रता की वर्षगांठ के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधान मंत्री ने स्वदेशी और सुरक्षा के संकल्प को पुनः उद्घोषित कर, देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप को प्रस्तुत किया। इसके बाद वाराणसी में भी कहा कि यदि भारत को अपने हितों की सुरक्षा करनी है तो प्रत्येक नागरिक को स्वदेशी को अपनाना होगा।

कोविड के दौरान स्वदेशी की ताकत का अहसास देशको तब हुआ जब पूरी दुनिया कोविड के सामने घुटने देख चुकी थी स्वयं को विकसित कहने वाले देश भी स्वयं की रक्षा करने में भी असमर्थ थे, ऐसे में भारत के समाज ने न केवल अपने आसपास के परिवेश की सेवा और सुरक्षा की। भारतीयों को भी सुरक्षित किया और स्वास्थ्य उपकरण बनाकर दुनिया को भी चकित कर दिया जिससे भारत में कोविड के प्रभाव को शेष दुनिया के मुकाबले कहीं कम कर दिखाया। समय आ रहा है कि हम वैश्विक बाजारों में अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ आगे बढ़ें।

                                        

प्रधान मंत्री ने कहा ही स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री ही देश को सच्चो सेवा होगी, देशवासियों से भी उन्होंने अपील की कि हम उसी सामान को खरीदें, जिसमें देश के लोगों का पसीना बहा हो। वर्तमान संदर्भ में, जब अमेरिका समेत अन्य देश हमारे देश की स्वतंत्र आर्थिक और विदेश नीति और बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत पर अंकुश लगाने को कोशिश कर रहे हैं, प्रधान मंत्री का यह आह्वान, एक विशेष महत्व रखता है। ध्यातव्य है अमेरिकाकं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्म ने भारत से आने वाले कई सामानों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क (कुल 50 प्रतिशत) थोपने और उसके ऊपर और जुर्माना भी तोकने को घोषणा यह कहकर की थी कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है। ट्रम्प ने यह कहा था कि भारत रूस से तेल खरीद कर रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध में मदद कर रहा है हालांकि भारत ने यह साफ कर दिया था कि अमेरिका इस संबंध में दोहरे मापदंड अपना रहा है, क्योंकि वह अब भी अपनी जरूरत के लिए रूस से व्यापारिक सम्बन्ध लगातार बनाये हुए हैं। प्रधान मंत्री ने वाराणसी के भाषण में अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के सन्दर्भ में स्वदेशी के महत्व को रेखांकित किया था। समझना होगा कि 15 अगस्त का प्रधान मंत्री का यह भाषण मात्र कोई भावात्मक अपील नहीं है, बल्कि उनको सरकार  का भारतको आगे बढ़ाते हुए 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने हेतु नीतियों की एक स्पष्ट दिशा का भी उद्घोष है।

MAKE IN INDIA हालांकि 2014 में सत्ता के सूत्र संभालने के बाद प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने हेतु मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, कौशल विकास, उद्यमिता विकास आदि को बार-बार कहते रहे हैं, लेकिन उसमें स्वदेशीके प्रति उनका इतना स्पष्ट आग्रह कभी नहीं रहा। देश को सशक्त बनाने में देश युवाओं, वैज्ञानिकों महिलाओं और उद्यमियों को भूमिका के बारे में उन्होंने सदैव विश्वास व्यक्त भी किया और उसके सुखद परिणाम भी देखनेको मिले, लेकिन कोविड के दौरान स्वदेशी को ताकत का यह अहसास देश को तब हुआ जब पूरी दुनिया कोविड के सामने घुटने देख चुकी थी अपने आपको विकसित कहने वाले देश भारत जैसे विकासशील देशों को मदद देना तो दूर स्वयं की रक्षा करने में भी खुद को आश्वस्त नहीं मान रहे थे।

ऐसे में भारत के समाज ने न केवल अपने आस-पासके परिवेश को सेवा और सुरक्षा की, बल्कि भारत में स्वयं के लिए वैक्सीन बनाकर समस्त जनसंख्याको सुरक्षित ही नहीं किया, बल्कि दवा और स्वास्थ्य उपकरण बनाकर दुनिया को भी चकित कर दिया था, जिसके चलते भारत में कोविड के प्रभाव को शेष दुनिया के मुकाबले कहीं कम कर दिखाया।

प्रधान मंत्री के स्वदेशी वस्तुओं के उपयोगके आह्यन को आगे बढ़ाते हुए स्वदेशी के आधार पर हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के संकल्प को दोहराते हुए नजर आये उन्होंने कहा कि हम किसानों के लिए उर्वरक तो बनायंगे ही अपने लड़ाक विमानों के लिए इंजन भी बनायेंगे। समय आ रहा है कि हम वैश्विक बाजारों में अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ आगे बढ़ें। आज अनिश्चित वैश्विक माहौल में यह और भी जरूरी हो गया है। उन्होंने अपने ही अन्दाज में इस बात को रेखांकित करते हुए कि भारतमें उत्पादन सस्ते में तैयार होता है, कहा कि हमें इस मंत्र पर काम करना होगा कि 'दाम कम और दम ज्यादा। प्रधान मंत्री का यह उद्घोष अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ताओं में आये गतिरोध और अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपनाये जा रहे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से प्रतिकूल रुख के सन्दर्भ में एक विशेष महत्व रखता है। जहां भूमंडलीकरण के समर्थक, देशों के बीच, आपसी निर्भरता का तर्क देते रहे हैं, प्रधान मंत्री का यह कहना कि दूसरे देशों पर निर्भरता खतरनाक है और हमें अपने हितों के संरक्षण हेतु आत्मनिर्भर होना है, सीधे तौर पर भूमंडलीकरण विचारको सिरे से खारिज करता हुआ दिखाई दे रहा है।

प्रधान मंत्री ने कहा कि इस वर्ष कि इस वर्ष के अंत तक हम सेमी कण्डक्टरकी पहली खेप तैयार करनेमें सफल हो जायेंगे। अमेरिका द्वारा भारत के डेयरी और कृषि बाजार तक पहुंच को मांग पर जोर देने के बीच, मोदी ने कहा कि वह भारत के किसानों, मछुआरों और डेयरी उद्योगमें कार्यरत लोगों के हितों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत का कृषि निर्यात चार लाख करोड़ रुपये का है। प्रधान मंत्री ने सभी छोटे और बड़े दुकानदारों से आग्रह किया कि उनके साइनबोर्ड पर यह लिखा होना चाहिए कि वे स्वदेशी सामान बेचते हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत का प्रतीक होगा और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल दूसरों को कमजोर करने के लिए भी किया जायगा। महत्वपूर्ण है कि स्वदेशी जागरण मंच इस प्रकार का आग्रह वर्षों से करता रहा है। इस बीच पाकिस्तान के आतंकवादियों और उसकी सैन्य क्षमता को नेस्तनाबूत करने के उद्देश्यसे आपरेशन सिन्दूर के दौरान अपनी प्रतिरक्षा क्षमता का दुनियाभर में जो प्रदर्शन भारत ने कर दिखाया उससे पाकिस्तान की प्रतिरक्षा प्रणाली तो ध्वस्त हुई ही, अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों और चीनका दंभ भी तोड़ने में हम सफल हुए। अभी तक ये देश अपने आपको बड़ी सैन्य शक्ति मानने का दंभ भर रहे थे।

हालांकि अमेरिका और यूरोप जो अपने स्वार्थके कारण रूस और यूक्रेनके युद्ध को हवा देते रहे हैं मात्र चार दिनों के आपरेशन सिन्दूर से ही विचलित हो गये और विश्व शांति को दुहाई देते हुए, युद्ध विरामको अपील करने लगे। उसका कारण यह था कि इन देशों को अपनी सैन्य वस्तुओं का बाजार खत्तरे में पड़ता दिखाई देने लगा था। यहां यह समझना जरूरी है कि पिछले सालों में भारत के सैन्य वस्तु निर्यात छह गुना बढ़‌कर २३६२२ करोड़ रुपये तक पहुंच चुके हैं। प्रतिरक्षा सामानीं का हमारा उत्पादन अब बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपयेतक पहुंच चुका है। सुरक्षा के मोर्चे पर, प्रधान मंत्री ने अगली पौड़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने को आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधान मंत्रीने कहा कि राष्ट्रीय महत्वके सभी स्थलों, रक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और पूजा स्थलों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जायगा। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्णके सुदर्शन चक्रने सरकार मिशन सुदर्शन चक्र को प्रेरित किया है, जो तकनीक का उपयोग करके न केवल दुश्मन के हमले को बेअसर करेगा, बल्कि कई गुना ज्यादा ताकत से जवाबी हमला भी करेगा। हालांकि प्रधान मंत्री के भाषण का अधिकार भाग, स्वदेशी, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उद्योग, कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को समर्पित था, लेकिन अपने लगभग 110 मिनटके भाषण में प्रधान मंत्रीने सामान्य जनको प्रत्यक्ष लाभ देने की प्रतिबद्धता को नहीं छोड़ा। लोगों के लिए डवल दिवाली का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में अगली पौड़ी के सुचारों को घोषणा करेगी, जिसका उद्देश्य आम लोगों पर कर का बोझ कम करना है, जिससे दैनिक जरूरतों की वस्तुएं सस्ती हो जायेंगी। गौरतलब है कि इस कदम से न केवल मुद्रास्फीति घटेगी, बल्कि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारमें ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जायेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।