तुम्हारी गंध यादों का दरवाजा है कोई खास गंध पुराने समय की याद दिलाती है      Publish Date : 14/05/2026

तुम्हारी गंध यादों का दरवाजा है कोई खास गंध पुराने समय की याद दिलाती है

                                                                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर

चाहे रंगों की खुशबू हो जिससे तुमने बचपन में खेला हो या फिर वह कपड़े धोने का साबुन जो तुम्हारे दादा-दादी हमेशा इस्तेमाल करते थे या कोई ऐसी चीज जो तुम्हारे अतीत से जुड़ी हो और जिसे तुम अब तक भूल चुके हो जो भी हो तुमने यह अनुभव जरूर किया होगा की कभी कोई खास गढ़ अचानक तुम्हारे मन में बीते समय की कोई जीवंत याद ले आती है। लेकिन सवाल यह है की गंध तुम्हारी यादों को इतने प्रभावी ढंग से क्यों जगा देती है वह भी उन यादों को जिन्हें तुम बहुत पहले भूल चुके होंगे।

स्मृति का रहस्य

इस प्रक्रिया की जो फैक्ट्री मेमोरी यानी ध्यान स्मृति कहा जाता है इसका एक कारण यह है की गंध तुम्हारी सबसे पुरानी इंद्रिय है, यहां तक की सबसे साधारण बैक्टीरिया भी अपने आसपास मौजूद रासायनिक संकेत को महसूस कर सकते हैं। यही क्षमता धीरे-धीरे तुम्हारे सुनने की शक्ति के रूप में विकसित हुई है। तुम्हारी संूघने की प्रणाली बेहद जटिल है किसी गढ़ को महसूस करने का मतलब है कि लाखों सूक्ष्म गढ़ नो का सांस के साथ भीतर जाना जो तुम्हारी नाक में मौजूद लाखों संवेदनशील न्यूरॉन्स को सक्रिय करते हैं। यह न्यूरॉन्स अलग-अलग गढ़ अंगों के प्रति प्रक्रिया करते हैं और मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं मानव नाक में लगभग 450 प्रकार के गांधग्रही होते हैं जिनकी मदद से तुम सैद्धांतिक रूप से एक ट्रिलियन तक अलग-अलग गंधों में अंतर कर सकते हो। यह सभी संकेत मस्तिष्क के एक भाग ऑल फैक्ट्री बल्ब में पहुंचते हैं जहां इन्हें समझ कर एक गंध के रूप में पहचाना जाता है।

ऑल फैक्ट्री बल्ब मस्तिष्क के उसे हिस्से के पास होता है जो यादों और भावनाओं से जुड़ा है यानी हिप्पोकेंपस और अभीग डाला यही कारण माना जाता है कि गंध तुम्हारी भावनाओं और यादों से इतनी गहराई से जुड़ी होती है। यही वजह है कि कोई गंध हमें अचानक हंसा सकती है तो रुला भी सकती हैं, या किसी भूले बिसरे पल में ले जा सकती है जबकि दृश्य ध्वनि या स्पर्श जैसी अन्य इंद्रियां मस्तिष्क के भावनात्मक हिस्से से इतनी सीधी नहीं जुड़ती है।

गंध और यादों का अनोखा रिश्ता

क्या कभी तुमने महसूस किया है कि किसी खास गंध ने तुम्हें अचानक बचपन में पहुंचा दिया जैसे ही मिट्टी की चांदी खुशबू आई तुम खुद को स्कूल के मैदान में खेलते हुए देखने लगे या किसी पुराने इत्र की महक ने किसी प्रिय व्यक्ति की याद दिला दी। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि मानव मस्तिष्क की एक अद्भुत विशेषता है। दरअसल गंध केवल नाक से महसूस नहीं होती वह सीधे दिल और दिमाग से  जुड़ जाती है। यही कारण है कि कोई साधारण सी खुशबू भी हमें जीवन के किसी अनमोल क्षण को याद दिला सकती है। आज वैज्ञानिक भी मानते हैं की गंध के जरिए स्मृति को जागृत करने की यह शक्ति मनोविज्ञान और चिकित्सा में भी उपयोगी हो सकती है। अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों में गधो के जरिए मरीज की याददाश्त को सक्रिय करने के प्रयोग किया जा रहे हैं अगली बार जब कोई खुशबू तुम्हें अतीत में ले जाए तो मुस्कुराओ क्योंकि वह सिर्फ गंध नहीं तुम्हारी स्मृतियों का दरवाजा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।