हमारे लिए भारत का हित सर्वप्रथम      Publish Date : 12/04/2026

       हमारे लिए भारत का हित सर्वप्रथम

                                                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

विश्व का इतिहास है की विभिन्न देश समय-समय पर अपने हितों का ध्यान रखते हुए अपने पक्ष बदलते रहे हैं। प्रथम विश्व युद्ध में जो इटली जर्मनी के साथ था वहीं द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिका के पक्ष में खड़ा हो गया। रूस और चीन द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिका के पक्ष में थे लेकिन आज यह दोनों अमेरिका के बड़े शत्रु माने जाते हैं। परिस्थितियां बदलती हैं और देश अपना हित ढूंढते हुए अपने शत्रु और मित्र भी बदलते रहते हैं, यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

आज कल ईरान अमेरिका युद्ध के समय कोई ईरान के पक्ष की वकालत कर रहा है तो कोई अमेरिकी हमलों को सही ठहरा रहा है। वास्तव में हमे तो केवल भारत का हित सोचना चाहिए और इस युद्ध में भारत का हित कहां है यह समझने का प्रयास वही लोग कर सकते हैं जो भविष्यवक्ता हैं। अमेरिका भारत को रूस का तेल खरीदने की छूट का ऐलान करता है जबकि भारत कहता है कि हमने तो रूस से तेल खरीदना बंद ही नहीं किया है, जो भी हो कच्चा तेल निर्यात करने वाले देशों के युद्धरत होने से अपने देश में तेल की आपूर्ति बाधित होने की संभावना अधिक है।

                                 

अपने यहां एक वर्ग ने यह प्रचारित किया कि तेल समाप्त हो रहा है इसपर तेल का भंडार करने वालों की भीड़ बढ़ने लगी जिसके कारण तेल कंपनियों को सामने आ कर कहना पड़ा कि यह अफवाह है। यदि युद्ध लंबा चला तो निश्चय ही तेल की आपूर्ति पर कठिनाई होगी ही लेकिन समाधान क्या है? समाधान का क्या विकल्प हो सकता है? इसके उत्तर में विद्वत जन सरकार को विदेश नीति और कूटनीति के अनेक रास्ते सुझा सकते है। सामान्य मनुष्य के समझने का तो एक ही विकल्प है कि जिसकी आपूर्ति सीमित है उसका उपभोग भी सीमित कर दिया जाय।

इन सब वैश्विक परिस्थितियों को समझने वाले और केवल राष्ट्र के हित का विचार करने वाले लोगों का समाज जितना प्रभावी होगा हर परिस्थिति से अपना देश उतना आगे निकल जाएगा। आज वैश्विक पटल पर कहीं कुछ हलचल होगी तो उसका असर तो पूरे विश्व पर पड़ेगा ही और हमारी शक्ति इतनी नहीं है कि सभी हलचलों को होने से पहले ही रोक दें अतः प्रत्येक प्रतिकूल परिस्थिति में अपनी हानि कम से कम हो ऐसी नीति सरकार को और ऐसा स्वभाव समाज को अपनाना होगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।