
हमारी निष्ठाएं राष्ट्र की सीमाओं के भीतर ही होनी चाहिए Publish Date : 04/04/2026
हमारी निष्ठाएं राष्ट्र की सीमाओं के भीतर ही होनी चाहिए
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
इजरायल और अमेरिका की सेनाओं ने ईरान पर हमला कर वहां के सुप्रीम लीडर की हत्या कर दी। इस पूरे घटनाक्रम में भारत का कुछ लेना देना स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है, भारत सरकार ने भी सधी और संतुलित प्रतिक्रिया दी है जो एक जिम्मेदार राष्ट्र ने नाते भारत की विदेशनीति का हिस्सा है। लेकिन इस सबमें एक बात समझ से परे है कि ईरानी नेता की मृत्यु पर भारत में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक मुस्लिम समुदाय द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन इस बात को प्रमाणित कर रहे हैं कि प्रदर्शनकारी भारतीय होने से पहले अपने मुस्लिम होने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
एक राष्ट्र की दृष्टि से प्रत्येक भारतीय की निष्ठा भारत के प्रति और हानि लाभ का पैमाना भारत के हानि लाभ से जुड़ा हुआ ही होना चाहिए। जब किसी समुदाय विशेष के द्वारा ऐसा आचरण प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो फिर ऐसे में उस संपूर्ण समुदाय का संदेह के घेरे में आना स्वाभाविक ही है। वंदे मातरम, भारत माता की जय बोलने में तो उन्हें आपत्ति होती है लेकिन किसी और देश के लोगों के यहां कुछ हो तो भारत के हितों को अनदेखा कर मजहबी प्रदर्शन करना किसी भी दृष्टि से देशभक्ति तो नहीं हो सकती है।

इस प्रकार की मानसिकता वाला समूह देश की सुरक्षा में कितना बड़ा खतरा साबित हो सकता है इसका अनुमान विश्व के अनेकों देशों के हालिया घटनाक्रमों के माध्यम से आसानी से लगाया जा सकता है, जब विदेशी ताकतों के साथ मिलकर अपने ही देश को उजाड़ने के लिए कुछ लोग सड़कों पर उतर जाते हैं। इसी मानसिकता के कारण एक बार देश का विभाजन पहले ही हो चुका है।
इन परिस्थितियों में किसी देशभक्त समाज की केवल इतनी ही जिम्मेदारी नहीं है कि वह स्वयं को सतर्क रखे बल्कि वह अपने बल और बुद्धि का प्रयोग कर उस समूह को भी उसके पूर्वजों का हवाला देते हुए राष्ट्र भक्ति की धारा में सम्मिलित करने का प्रयास करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
