हिंदू संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है      Publish Date : 03/04/2026

         हिंदू संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है

                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारतीय संस्कृति और हिंदू संस्कृति दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं, अर्थात दोनों में कोई अंतर नहीं है। यही संस्कृति ही भारत को भारत बनाती है और इसी संस्कृति के अनुसार जीवन जीने वाला समाज स्वाभाविक रूप से भारत भक्त होता है। जब से विदेशी आक्रमण भारत पर शुरू हुए तब से ही दो प्रकार के लोग अपने देश में देखे गए हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है की जिन्होंने हिंदू संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रयास किया वे सभी आज भी भारतीय समाज के आदर्श पुरुष बने हैं, देश भक्ति का पैमाना उन लोगों के जीवन के आधार पर तय होता है।

                              

भारतीय संस्कृति भारत राष्ट्र के लिए वैसी ही है जैसे किसी शरीर में प्रवाहित होने वाला रक्त, कोई कहे कि मैं आपके बहते हुए रक्त को रोकने का प्रयास नहीं करूंगा बल्कि उसे घाव को और बढ़ा दूंगा जिससे यह रक्त निकल रहा है तो निश्चय ही वह हमारी मृत्यु का प्रयास कर रहा है बदले में भले ही वह हमें अच्छे भोजन और वस्त्र भेंट स्वरूप दे रहा हो। कुछ परिस्थितियों में ऐसा ही देखा जा सकता हैं जहां कुछ बातें दिखने में अच्छा लगती है थोड़ी बहुत देर तक हमें सुख के भ्रम में भी रखती हैं परंतु धीरे-धीरे वह हमें हमारी संस्कृति से दूर ले जाती है।

जैसे-जैसे भारत में हिंदू संस्कृति का प्रवाह कमजोर होगा वैसे-वैसे भारत देश कमजोर हो जाएगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा विवाह संबंधित कल एक टिप्पणी की गई जो चर्चा का विषय बनी है। कुछ लोग स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर इसकी आलोचना और विरोध भी करेंगे, लेकिन यह प्रश्न तो हम सबके सामने है कि जैसे-जैसे सांस्कृतिक मूल्यों में गिरावट आई वैसे-वैसे हम बड़े दुख के भंवर में फंसते चले जा रहे हैं। जिसके जीवन में मानव मूल्यों का दर्शन होता रहता है वही व्यक्ति संस्कृति का पालन और उसका संरक्षण कर रहा है अर्थात अपनी संस्कृति मानव संस्कृति भी है।

                               

यदि मनुष्य भारत की भूमि द्वारा प्रदत्त मूल्यों को छोड़ दे तो वह भारत का किसी भी धरती पर मनुष्य के रूप में रहने योग्य नहीं रह जाता, जिस समाज ने मूल्यों का तिरस्कार किया आज वे पशुवत जीवन जी रहे है। संस्कार से संस्कृति का पोषण करना हम सभी का दायित्व है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।