
संकट काल में भी भारत मजबूत राष्ट्र के रूप में Publish Date : 02/04/2026
संकट काल में भी भारत मजबूत राष्ट्र के रूप में
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
विश्व के अनेक देशों में युद्ध की स्थितियों के कारण सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है, जिसका असर अन्य देशों पर होना स्वाभाविक है। आज विश्व का ऐसा कोई देश नहीं है जिस पर वैश्विक परिस्थितियों का असर न पड़ता हो। खाद्यान्न, औषधि से ले कर पेट्रोलियम पदार्थों के लिए कहीं न कहीं एक दूसरे पर निर्भरता है। अतः जैसे ही युद्धों के कारण इन सब वस्तुओं का आवागमन बाधित होता है देशों में संकट उत्पन्न होने लगता है, इन परिस्थितियों में केवल वही देश सामान्य बने रह सकते हैं जिनकी न्यूनतम आवश्यकताओं के लिए निर्भरता अन्य देशों पर भी न्यूनतम हो।

अपने पड़ोसी देशों की स्थिति काफी खराब हो रही है क्योंकि पेट्रोलियम पदार्थों की उपयोगिता काफी अधिक हो रही है और आज कल उसकी उपलब्धता पर ही संकट आ गया है। संकट के इस दौर में भी भारत के संबंध अधिकांश देशों से अच्छे बने हुए हैं क्योंकि भारत ने केवल कूटनीति से जिन्ही बल्कि अपने स्वभाव के कारण विश्व में एक अलग पहचान बनाई है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अन्य देशों पर संकट आने पर निरपेक्ष भाव से सहायता पंहुचाई है चाहे वह कोई प्राकृतिक आपदा हो या फिर कोरोना महामारी का संकट, यह स्वभाव विश्व में सभी को अच्छा लगता है क्योंकि संकट काल में काम आने वाला मित्र ही मित्र होता है।
अपनी शक्ति का प्रयोग दूसरों को समाप्त करने के लिए नहीं बल्कि उत्थान करने में लगाना ही भारत की विचार है और आज यही विचार विश्व शांति के लिए प्रासंगिक है। हम सौभाग्यशाली लोग हैं जिन्हें भारत में ऐसे समय में जन्म मिला है जब हम एक अपने स्वभाव के अनुसार व्यवहार करने वाला एक शक्तिशाली भारत देख रहे हैं। मुझे लगता है संकट के इस काल खंड में हम अपने राष्ट्र के साथ खड़े होने के लिए सभी आवश्यक त्याग करने को प्रस्तुत हों यह हमारे जीवन की धन्यता होगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
