ऊपरी चमक बनाम जमीनी सच, बजट की असली चुनौती      Publish Date : 27/03/2026

ऊपरी चमक बनाम जमीनी सच, बजट की असली चुनौती

                                                                                            प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

बजट में विकसित भारत का वादा किया गया है, लेकिन खतरा यह है कि कहीं मजबूत नींव बनाने से पहले ऊपर की मंजिल तो नहीं बनाई जा रही। भारत का ताजा बजट बहुत महत्वाकांक्षी दिखता है, पर 'सवाल है क्या आधार इतना मजबूत है?

बजट का मुख्य भरोसा इस बात पर है कि सरकार बड़े स्तर पर निवेश करेगी तो निजी कंपनियां भी निवेश बढ़ाएंगी। सरकार 12.2 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च पर लगाने की योजना बना रही है, ताकि रेल, बंदरगाह और लाजिस्टिक्स बेहतर हों और कंपनियां फैक्टरी लगाने के लिए प्रेरित हों। सोच सही है, लेकिन पिछले कुछ सालों में निजी निवेश बहुत तेज नहीं रहा। कंपनियां अब भी वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापार नीतियों को लेकर सावधान हैं। निवेश हो तो रहा है, पर सिर्फ कुछ क्षेत्रों में जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, डाटा सेंटर और इलेक्ट्रानिक्स।

                             

अगर यही चलता रहा तो विकास तो होगा, पर वह हर क्षेत्र और हर वर्ग तक नहीं पहुंचेगा। बजट में शहरों को विकास का इंजन माना गया है। नए आर्थिक क्षेत्र और तेज रफ्तार रेल कारिडोर (जैसे पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु) पर जोर है। उम्मीद है कि शहर 'आगे बढ़ेंगे तो गांव भी आगे बढ़ेंगे। लेकिन ग्रामीण भारत की स्थिति अलग है। वहां खपत धीमी है और खेत मजदूरों की असली आय महंगाई के साथ कदम नहीं मिला पा रही। सरकार ने रोजगार और आजीविका मिशन (वीबी-जी राम जी) के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये और 125 दिन का रोजगार गारंटी बढ़ाने की घोषणा की है। यह दिखाता है कि सरकार गांवों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रही, पर फोकस अभी भी शहरों पर ज्यादा है। सरकार ने राजकोषीय घाटा 4.3% रखने का लक्ष्य रखा है, जिससे निवेशकों को भरोसा मिलता है कि अर्थव्यवस्था संभली हुई है।

                               

लेकिन यह लक्ष्य इस अनुमान पर टिका है कि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी। अगर अमेरिका या वैश्विक व्यापार में मंदी आई तो टैक्स वसूली कम हो सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।