स्वामी जी के सपनों को पूरा करता संघ      Publish Date : 22/03/2026

    स्वामी जी के सपनों को पूरा करता संघ

                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

जीवन के मात्र 39 वर्षों में ही पूरे राष्ट्र का गौरव बन जाना और युगों युगों तक पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन बन जाना यह कोई सामान्य व्यक्तित्व नहीं हैं, संसार इन्हें स्वामी विवेकानंद के नाम से जानती है। जिस प्रकार से आज का युवा छोटी-छोटी उपलब्धियों पर अहंकार से भर उठता है यदि हम तुलना करें तो उसे युवा संन्यासी के जीवन के सम्मुख क्या आज की कोई उपलब्धि प्रतिस्पर्धा कर पाएगी?

बिना संसाधनों के विश्व के पटल पर अपने धर्म अपने राष्ट्र अपने पूर्वजों के विचारों का विश्वास और गर्व से ओतप्रोत ऐसा वर्णन करना जिससे प्रभावित होकर दुनिया उनकी अनुयाई बन गई। लोग अपने देश अपने परिवार छोड़कर स्वामी जी के साथ भारत की मिट्टी में आकर अपने को धन्य मानने लगे।

                          

स्वामी जी जब यह सब कर रहे थे तब वे उसी आयु के थे जिन्हें आज र्मद कहा जा रहा है। उस समय स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था कि अगले 100 वर्षों तक भारत के युवाओं की आराध्य माता भारतमाता हों और अपने सुख वैभव का विचार ना करते हुए संपूर्ण संसार को सुखी बनाने के लिए अपनी इस भारत माता को शक्ति और वैभव संपन्न बनाने का संकल्प कर लें।

पिछले 100 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वामी जी के सपनों को साकार करने वाले युवाओं के निर्माण में लगा है। भारत माता ने कैसे अद्भुत संतानों को जन्म दिया है जिनकी प्रेरणा केवल भारत में नहीं बल्कि संपूर्ण जगत में फैली हुई है, जिनके आदर्श की चर्चा पूरा संसार कर रहा है। आज के युवाओं को यह जानना आवश्यक है कि जब युवा नरेंद्र को गुरु की कृपा से देवी मां से सब कुछ प्राप्त करने का अवसर आया तब उन्होंने अपने लिए धन वैभव नहीं बल्कि ज्ञान और भक्ति का मार्ग मांगा।

यही वह मार्ग है जिस पर चलकर इस मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है, ज्ञान मनुष्य को विवेक प्रदान करता है तो भक्ति मन के संशय के अंधकार को दूर करती है जिससे मनुष्य सत्कर्मों में प्रवृत्त होता है। एक सुखी समृद्ध जीवन के लिए भोगवादी पद्धतियों का छोड़ते हुए युवाओं को त्याग का मार्ग स्वीकार कर परमार्थ के लिए जीवन अर्पण करने के मार्ग पर बढ़ाना होगा और इसके लिए उनकी प्रेरणा होंगे स्वामी विवेकानंद।

जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन, वही प्रेरणा पुंज हमारे स्वामी पूज्य विवेकानंद।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।