
गन्ने के खेतों से निकली चीनी उद्योग के लिए मिठास Publish Date : 21/03/2026
गन्ने के खेतों से निकली चीनी उद्योग के लिए मिठास
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
देश का चीनी सेक्टर इस बार मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और इसका फायदा सीधे किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। चालू पेराई सत्र में गन्ने की पेराई तेज हुई है और चीनी उत्पादन में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 तक देश की 499 चीनी मिलों ने करीब 1340 लाख टन गन्ने की पेराई कर ली है। यह पिछले साल की समान अवधि से करीब 237 लाख टन अधिक है। अधिक पेराई का सीधा मतलब है अधिक चीनी उत्पादन। इसी अवधि में 118 लाख टन नई चीनी तैयार हुई है, जो साल भर पहले से 23 लाख टन अधिक है।

केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि चीनी निकालने की क्षमता यानी रिकवरी रेट में भी सुधार हुआ है। इस साल औसतन 8.83 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 0.76 प्रतिशत अधिक है। पूरे 2025-26 पेराई सत्र को लेकर तस्वीर और भी बेहतर बताई जा रही है। एथनाल बनाने के लिए करीब 35 लाख टन चीनी को अलग करने के बाद भी देश में 315 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में 53.20 लाख टन अधिक है। इसका मतलब यह है कि बाजार में चीनी की कमी की आशंका फिलहाल नहीं है और उपभोक्ताओं को कीमतों में बड़े उछाल का डर कम रहेगा।
4,756 लाख टन से अधिक हो सकता है गन्ने का उत्पादन
गन्ना उत्पादन के मोर्चे पर भी किसानों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ वर्षों में गन्ने का कुल उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2025-26 के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि उत्पादन 4756 लाख टन से अधिक पहुंच सकता है। अधिक पैदावार का मतलब है किसानों की फसल बिकने की बेहतर संभावना। किसानों के लिए सबसे अहम सवाल गन्ने के भुगतान का होता है। चीनी सेक्टर की मजबूती का सीधा असर इसी पर पड़ता है। केंद्र सरकार की नीतियों जैसे समय पर एफआरपी (उचित और लाभकारी मूल्य) तय करना, अतिरिक्त चीनी को एथनाल में बदलने की अनुमति और निर्यात से जुड़े फैसलों से मिलों की आर्थिक हालत सुधरी है।
इसका नतीजा यह हुआ है कि कई राज्यों में किसानों को भुगतान पहले की तुलना में जल्दी मिल रहा है। एफआरपी में लगातार बढ़ोतरी ने भी किसानों को भरोसा दिया है। कुछ साल पहले गन्ने का एफआरपी 285 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 355 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
