
गुस्सा आए भी तो हावी न हो जाए Publish Date : 19/03/2026
गुस्सा आए भी तो हावी न हो जाए
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
दिनभर में कई ऐसी बातें होती हैं, जो हमें पसंद नहीं आतीं। ऐसे में गुस्सा हमारे भीतर का अनकहा दर्द हो सकता है, तो बदलाव की छटपटाहट भी। गुस्सा आना सामान्य है, बस उसमें अटके रहना सही नहीं है। आज के हमारे लेख में कुछ ऐसे उपाय दिए हैं, जिनकी मदद से आप धीरे-धीरे अपने गुस्से को कम करने में कामयाब हो सकते है।
- “जब आप दूसरों पर आरोप लगाते हैं, तो आप बदलने की अपनी शक्ति को भी खो देते हैं।’
मैं पहले बहुत गुस्सैल हुआ करता था और मुझे इस पर गर्व था। हाई स्कूल के दिनों में मैंने अपनी पहचान ही एक गुस्सैल लड़के की बना ली थी। मुझे लगता था कि मुस्कराना ’कूल’नहीं है, इसलिए मैंने मुस्कुराना छोड़ दिया। मुझे लगता था कि मैं बहुत बेबाक हूं, लेकिन सच यह था कि मैं अपने भीतर की असुरक्षा और उस दर्द को छिपा रहा थी कि मेरा अपने जीवन पर कोई नियंत्रण नहीं है। किस्मत से बीस की उम्र में मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ जब मेरे ही एक दोस्त ने मुझसे पूछा, ’क्या तुमने कभी गौर किया है कि तुम्हारी लोगों से बहुत लड़ाइयां होती हैं?’

मेरे दोस्त की इस बात ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। आज मैं किशोरों की काउंसिलिंग करता हूं और उन्हें गुस्सा काबू करना भी सिखाता हूं। गुस्सा एक सामान्य भावना है, लेकिन जब यह वेकावू होकर विनाशकारी हो जाता है, तो आपके रिश्तों, काम और जीवन की गुणवत्ता को बर्बाद कर देता है। अच्छी खबर यह है कि गुस्सा चाहे कहीं से भी आया हो. (आनुवंशिकता, वचपन के अनुभव या जीवनशैली), आप इसे काबू करना सीख सकते हैं।
अपनी सुबह की शुरुआत पर ध्यान दें
आपका दिन कैसे बीतेगा, यह इस पर भी निर्भर करता है कि आपकी सुबह कैसी थी। अपने अलार्म को 15 मिनट पहले सेट करें। बिस्तर से उठने से पहले कुछ गहरी सांसें लें और स्वयं से कुछ सकारात्मक कहें। जैसे- मुझे आज एक नई शुरुआत का मौका मिला है। इसी तरह जब भी दिन में जल्दबाजी महसूस हो, खुद को याद दिलाएं- मेरे पास पर्याप्त समय है।
अपने गुस्से को करीब से पहचानें
जब आपके पास कम से कम 30 मिनट का खाली समय हो, तो यह अभ्यास करें। आंखें बंद करके बैठें और सोचें कि आपका गुस्सा कैसा दिखता है? आपको क्या रंग या चित्र दिखते हैं? शरीर के किस हिस्से में तनाव महसूस होता है? इसके बाद एक कागज पर वे सभी बातें लिख डालें, जो आपको गुस्सा दिलाती हैं। उनमें से सबसे बड़ी तीन वजहों को चुनें और ईमानदारी से उसकी मूल वजह पर विचार करें। हर एक के लिए तीन समाधान लिखें। मसलन, अगर समस्या आपकी ’नौकरी’ है, तो हल यह हो सकता है कि आप अपना बायोडाटा अपडेट करें या नए अवसरों के लिए लोगों से मिलें। अपनी योग्यता बढ़ाएं। नया सीखने के लिए तैयार रहें। समय समय पर यह अभ्यास करें।
तकनीक से कुछ देर दूरी भी बनाएं
तकनीक हमें तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाती है। फोन की घंटी बजते ही हम जवाब देने के लिए दौड़ते हैं। यह जल्दबाजी अक्सर गुस्सा भड़काती है। दिन का कुछ समय ऐसा तय करें, जब आप सोशल मीडिया व मैसेज से दूर रहें।
कामों को सहज गति से पूरा करें
सोचने, बोलने, गाड़ी चलाने, खाने और यहां तक कि चलने की गति को थोड़ा धीमा करें। जब आप धीमे होते हैं, तो आप अपनी आंतरिक भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण महसूस करते हैं। याद दिलाने के लिए अपनी कार या कंप्यूटर पर ’धीमे चलें’ के स्टिकर लगा सकते हैं।
अच्छी नींद कम करे झुंझलाहट
अगर मुझे गुस्सा काबू करने का सिर्फ एक तरीका चुनना हो, तो वह है पर्याप्त नींद। नींद की कमी चिड़चिड़ेपन, चिंता और अवसाद का सबसे बड़ा कारण है। अगर आपकी आंखें ही ठीक से नहीं खुल रहीं, तो आप शांत और समझदारी भरे फैसले नहीं ले पाएंगे। कुल मिलाकर, बदलाव के लिए हर चीज आपके भीतर मौजूद है। बस रोजाना अभ्यास और धैर्य रखने की जरूरत है। याद रखें, अतीत में जीना अवसाद देता है और भविष्य को चिंता घबराहट पैदा करती है। केवल वर्तमान में जीना ही आपको सही फैसले लेने और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करता है। आपके आज पर ही कल की नींव टिकी है।
तीन मजेदार बातें लिखें
आप दिनभर में आपके साथ हुई तीन मजेदार बातें लिखें। वह घटना कैसे घटी थी? क्या आप उसमें सीधे तौर पर शामिल थे? क्या आपने उसे केवल देखा था या वह कुछ अचानक से हुआ था? जब आप खुद पर और अपनी परिस्थितियों पर हंस पाते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप जीवन को बहुत गंभीरता से नहीं लेते। सबसे अच्छी बात हंसी संक्रामक होती है। आप भी हंसते हैं और दूसरे भी।
मन की शांति के 5 मंत्र
खुद से अच्छी बातें
सुबह उठते ही खुद से कहें- मेरे लिए आज एक नई और बेहतर शुरुआत का दिन है।
ठहरकर सोचें
किसी भी बात पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय 30 सेकंड का ब्रेक लें।
एक घंटा अपने लिए भी निकालें
दिन में कम से कम 1 घंटा फोन और सोशल मीडिया से दूर रहें। अपनी देखभाल करें।
रफ्तार धीमी करें
छोटे-छोटे कामों में अपनी हड़बड़ी नोट करें। बोलने, चलने व खाने में जल्दबाजी न करें।
पर्याप्त आराम करें।
रात को जल्दी सोएं। शांत दिमाग के लिए 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
