वृक्षों की महिमा और वातावरण      Publish Date : 12/03/2026

         वृक्षों की महिमा और वातावरण

                                                                                                         प्रोफेसेर आर. एस. सेंगर

जिसके लिए मौसम को कर दिया गर्म

पेड़ों को काटकर उजाड़ दिए जंगल और पहाड़

सुखा दिए गए कूएं, तालाब, झील, नदियाँ और समुद्र

युद्व छेड़ दिया एक-दूसरे से वर्चस्व और विनाश के लिए

विज्ञान को बना दिया गया विनाश का संयंत्र

और अर्थशास्त्र को कर दिया प्रकृति के विरूद्व

                                 

अखबार और टीवी के चैनलों में बटते दिग्भ्रमित उत्तेजक ज्ञान से मैं तलाशता रहा अपना युग-धर्म मेरी सँस्कृतियां बंधी रही खूँटे से बंधे पालतू की तरह

फोन की स्क्रीन में खोजती हुई बेचैनी से राहत, मैं उलझता गया उत्तेजना के उद्वेलन से उपजे वर्चुअल भ्रमजाल में लम्बे समय तक लगातार।

मेरे साथ जाने वाला वह चिन्हा पेड़ कहीं बूढ़ा हो रहा है मेरी तरह ही

तैयार कर रहा है मेरे लिए लकड़ी मेरे साथ ही एक अजाने और अंतिम स्नान के लिए

जाने कितने और कैसे हैं, पत्ते, फल और फूल और कितनी हरी हैं उसकी जड़ें

मिट्टी को पानी और पानी को जड़ों से जोड़ती हुई।

देह, गंध और पत्ता-पत्ता।

पक्षियों की पंचायत और पतंगों की भुनभुनाहट जिनका घर है यह पेड़।

प्रस्तुतिः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।