
फरवरी में अचानक बढ़ती गर्मी और सिमटता हुआ बसंत Publish Date : 26/02/2026
फरवरी में अचानक बढ़ती गर्मी और सिमटता हुआ बसंत
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
आजकल मौसम में अचानक बड़ी तेजी के साथ बदलाव हो रहा है, अभी फरवरी का ही महीना चल रहा है और धूप इतनी तेज होने लगी है कि लोगों के स्वेटर, जैकेट आदि सभी दो दिन में ही उतर चुके हैं। ऐसे में क्या यह स्थिति दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस मौसम के तापमान में अचानक वृद्धि हो रही है।
उत्तर भारत में इस वर्ष में फरवरी का महीना अप्रत्याशित गर्मी लेकर आ चुका है और कई शहरों में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और लोगों को ऐसा महसूस हो रहा है कि सर्दी के बाद सीधे ही मई के महीने वाली गर्मी का मौसम महसूस होने लगा है। हालांकि इस समय फागुन की हल्की गर्मी और रात की ठंडक वसंत को सुखद बनाती थी, परन्तु अब इस समय की तेज धूप और शुष्क हवाएं लोगों को परेशान कर रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार फरवरी में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किा जा रहा है। ऐसे में मौसम में यह केवल अस्थाई बदलाव नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन का संकेत है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती गर्मी और ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। औद्योगीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या, जंगलों की कटाई और शहरी हीट आयरलैंड प्रभाव में तापमान बढ़ने के चलते मौसम में ऐसा परिवर्तन हो रहा है। इस बदलते मौसम का असर प्रकृति और कृषि पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अब सरसों के फूल जल्दी झड़ रहे हैं, फसलें समय से पहले पकने को तैयार हो रही है और गेहूं जैसी रवि फसलों की उपज पर खतरा बढ़ता जा रहा है। मिट्टी की नमी का तेजी से कम होने के कारण सिंचाई की मांग भी बढ़ सकती है। इसके साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यदि फरवरी में ही गर्मी इसी प्रकार बढ़ती रही तो हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसे में सिमब्ता हुआ बसंत हमारे लिए एक चेतावनी है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है।
जब बसंत काल चलता था तो काफी लोगों में खुशहाली महसूस की जाती थी और तापमान भी अनुकूल रहने के कारण खेत भी अच्छे दिखाई देते थे, लेकिन अचानक सिमटते हुए बसंत केवल मौसम के बदलाव का नहीं बल्कि चेतावनी है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं तो आने वाले वर्षों में ऋतुओं की पहचान धुंधली हो सकती है। इसलिए हम सभी लोगों का कर्तव्य है कि प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ना करें।
इको फ्रेंडली चीजों को बढ़ावा दें तथा पर्यावरण के होने वाले नुकसान से बचने के लिए ऐसे उपाय करें जिससे कि हमारा पर्यावरण कम से कम प्रभावित हो, नहीं तो आने वाले समय में हम बढ़ती गर्मी से काफी परेशान हो जाएंगे। इसलिए सभी लोगों को प्रयास करना होगा कि वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक वैचारिक क्रांति लाएं, जिससे प्रत्येक व्यक्ति इस और ध्यान दें और अपना योगदान देकर पर्यावरण फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण लगाकर उनको समृद्ध करने का संकल्प लें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
