
क्या झूठ प्रभावी होगा? Publish Date : 20/02/2026
क्या झूठ प्रभावी होगा?
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
हम सब ने यह तो सुना है कि एक झूठ को बार-बार बोलने से वह सत्य के जैसा लगने लगता है लेकिन यह बात सर्वत्र लागू नहीं होती। यदि सौ बार क्या एक लाख बार भी कहा जाय की नमक खाने में मीठा होता है तो निश्चित ही कोई भी विश्वास नहीं करेगा, अर्थात कुछ सत्य ऐसे हैं इसके बारे में कोई भी भ्रम सफल नहीं होगा। अपने देश में आजकल दो ऐसे झूठ स्थापित करने के प्रयास हुए हैं, हाल ही के दिनों में एकतरफ जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हिंदू विरोधी सिद्ध करने के प्रयास हुए वहीं दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री को देश की सुरक्षा के संदर्भ में कमजोर सिद्ध करने के प्रयास हो रहे हैं।
यह दोनों प्रयास कोई सामान्य नहीं है यह बात अलग है कि यह कोशिश करने वाले लोग शायद यह नहीं जानते कि जिन बातों का अनुभव समाज ने स्वयं कर लिया हो उसके प्रति जोर-जोर से झूठ बोलने पर भी समाज में उसको लेकर स्वीकार्यता नहीं होती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अनेक प्रकार के झूठ वर्षों तक फैलाए गए लेकिन जब समय के साथ-साथ समाज ने संघ का अनुभव किया तब वह सारे प्रयास विफल हो गए और वे लोग स्वयं प्रश्न के घेरे में आ गये जो यह झूठ फैला रहे थे। पिछले दशक में भारत की मजबूती के अनेक कारण हैं लेकिन जो दो प्रमुख कारण हैं वह है राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा और दूसरा हिंदुत्व का बढ़ता प्रभाव ।

निश्चित रूप से जिन लोगों को इस रूप में भारत अच्छा नहीं लगता वह इन दोनों को कमजोर करने के लिए आघात करेंगे। हिंदुत्व के प्रतीक के रूप में भव्य राम मंदिर के शिखर पर स्थापित धर्मध्वजा और पाकिस्तानी की सीमाओं के भीतर घुसकर उनके आतंकी ठिकानों को नष्ट करती भारतीय सेना देश की सुरक्षा के नए अध्याय लिख चुकी है। ऐसे समय में इन दोनों विषयों पर इस प्रकार के प्रश्न खड़े करने के प्रयास भारत विरोधी षडयंत्र के हिस्से होने की पुष्टि कर रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
