
हिंदू सम्मेलनों का संकेत Publish Date : 17/02/2026
हिंदू सम्मेलनों का संकेत
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में देशभर में विभिन्न स्थानों पर हिंदू समाज के द्वारा हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जा रहे हैं। यह सम्मेलन हिंदू समाज की संगठित होती अवस्था के प्रमाण है, जहां हिंदू समाज का प्रत्येक वर्ग उत्साह के साथ उल्लास मनाता हुआ इन सम्मेलनों में सहभागी हो रहा है। हिंदू समाज को बांटने के अनेक षड्यंत्र के बाद भी संघ के स्वयं सेवकों पर उनके आसपास के समाज का भरपूर विश्वास इन सम्मेलनों की सफलता के रूप में दिख रहा है।
एक तरफ जहां सामाजिक समरसता की चर्चा सम्मेलनों की वक्ताओं की केंद्र में है वहीं भारत को सशक्त करने के लिए हिंदू समाज की संगठित शक्ति और बढ़े इसकी चर्चा सम्मेलन में आए हुए महिला पुरुष करते सुनाई दे रहे हैं। कुछ विषयों का बहाना बनाकर समाज की कुछ शक्तियां अनावश्यक रूप से संगठित हिंदू शक्ति को कमजोर करने के लिए कुछ मुखौटों को आगे रखकर प्रयास करती हैं लेकिन यह हिंदू सम्मेलन उनके सभी षडयंत्रों और प्रयत्नों पर पानी फिरते हुए दिखाई दे रहे हैं।

यह तो निश्चित है कि हिंदू समाज भारत की शक्ति का आधार है और जब वह आधार संगठित और सुदृढ़ रहता है तो भारत के विरोधी इसको कमजोर करने के लिए अनेक अनेक प्रयत्न भी करते हैं। आज यह आवश्यकता स्पष्ट है कि प्रत्येक हिंदू इस हिंदू संगठन की अवस्था को और प्रभावी बनाएं। हिंदू समाज जब संगठित होकर शक्तिशाली होता है तब वह शांति की बात करता है क्योंकि यह हिंदू का स्वभाव है, हिंदू समाज पर होने वाले आक्रमण जैसे लव जिहाद और कन्वर्जन के बारे में आज हिंदू समाज जागृत होता दिखाई दे रहा है।
हिंदू किसी को कन्वर्ट करने नहीं जाएगा लेकिन अपने लोग इसका शिकार न हो यह चिंता और इसकी व्यवस्था हिंदू को स्वयं करनी होगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
