इस युग में शक्ति का महत्व      Publish Date : 26/01/2026

                       इस युग में शक्ति का महत्व

                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत जब अंग्रेजों का गुलाम था तब अनेकों क्रांतिकारी अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए प्रयास कर रहे थे। मातृभूमि के प्रति भक्ति का भाव जगाने के लिए नागरिकों को प्रेषित कर रहे थे। अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध खड़े होने का साहस बना रहे थे। जिन्होंने हमको गुलाम बनाया है उन्हें हमें गुलाम बनाने का अधिकार किसने दिया? हम उनकी गुलामी को स्वीकार नहीं करते हैं। इत्यादि कारणों से क्रांतिकारी पर मुकदमे चलाए जाते थे, मुकदमे सुनने वाला भी अंग्रेज होता था।

                                                  

नीति तय करने वाले निर्णय करने वाले सब विदेशी थे हर मुकदमे की सुनवाई का एक ही परिणाम होता था वह था क्रांतिकारियों की सजा। कभी मृत्युदंड तो कभी वर्षों का कारावास।  वेनेजुएला के मामले में भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति अमेरिकी कैद में है। उनको उनके देश से नहीं बल्कि उनके घर के भीतर से एक दूसरे देश की सेना उनकी संप्रभुता को तार तार करती हुई गिरफ्तार करके लाती है और अपने देश में उन पर मुकदमा चलाती है मुकदमे में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी अर्थात 17 मार्च तक तो उन्हें कैद रहना ही है और मुकदमे का निर्णय वही होगा जो अमेरिका चाहेगा।

तो फिर यह सब सुनवाई का ड्रामा क्यों हो रहा है? न्याय के अधिकारों की बातों का क्या हुआ? यह सब बातें या तो उन पर लागू नहीं होती हैं या उनके अनुसार लागू होती हैं जो शक्तिशाली है। वेनेजुएला की सेना अमेरिकी सेना की तुलना में शक्तिशाली नहीं है क्या हम कहें बराबरी की भी नहीं है इसलिए उसे देश को यह सब भुगतना ही पड़ेगा। अमेरिका की नियति व्यापार है वह अपने व्यापार के लिए कुछ भी कर सकता है। जो भारत को अपना सबसे अच्छा मित्र बताता था आज वह भारत का शत्रु बन गया है लेकिन क्योंकि भारत सेना और अन्य शक्तियों के मामले में वेनेजुएला की तरह कमजोर नहीं है इसलिए अमेरिका केवल गीदड़ भभकी ही दे रहा है।

                                                             

एक और भी कारण है कि अमेरिका यह जानता है कि भारत में एक छोटा वर्ग है जो अपने स्वार्थ के कारण देश के साथ गद्दारी कर सकता है लेकिन बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो देश के लिए स्वयं को बलिदान भी कर सकता है और यही वर्ग भारत की शक्ति भी है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।