जीवन मूल्यों की प्रेरणा देता मकर संक्रांति      Publish Date : 25/01/2026

              जीवन मूल्यों की प्रेरणा देता मकर संक्रांति

                                                                                                                                                      प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

सूर्य जिसके बिना इस चराचर जगत की कल्पना करना भी व्यर्थ है, अपने पूर्वजों ने उसे आराध्य माना है। भगवान वही तो है जो हमें जीवन प्रदान करता हो और जो इतना शक्तिशाली हो कि जिसे हम कुछ दे नहीं सकते है बल्कि हम केवल उसकी आराधना कर सकते हों।

वैदिक युग से इस धरती पर सूर्य की पूजा होती रही है और विभिन्न रूपों में सूर्य के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी यहां चलता आया है उनमें से ही एक है मकर संक्रांति। देश के अलग अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न नामों से मनाया जाने वाला यह त्यौहार उल्लास का प्रतीक तो है ही साथ ही जीवन के गहरे मूल्यों का संदेश भी देता है। जैसे कण कण में परमात्मा है वैसे परमात्मा के सभी रूपों को अपने किरणों से स्नान कराने की चेष्टा सूर्य की किरणों में दिखाई देती है।

                                                         

इसी चेष्टा का परिणाम है विभिन्न राशियों से होते हुए वर्ष भर की अनवरत यात्रा जो हमे बता रही है कि सद्कार्यों की चेष्टा रखते हुए सतत प्रयत्न का परिश्रम चलते रहना चाहिए। लोकहित के लिए प्रयास करने की सबसे सार्थक प्रेरणा यदि कोई दे सकता है तो वह सूर्य हैं जहां बदले में कोई स्वार्थ नहीं है यश अपयश की चिंता भी नहीं।

सूर्य का प्रकाश यह बता रहा है कि जीवन के सभी रंगों को संतुलित रखते हुए श्वेत अर्थात स्वच्छ सौम्य बने रहना चाहिए और अपने जीवन के इस प्रकाश को देते समय किसी में भेद नहीं बल्कि सबके एकत्व के दर्शन की दृष्टि बनी रहे। गुड़ का स्वभाव रखते हुए बिखरे तिलों की तरह अपने समाज को समेटने से स्वादिष्ट मिष्ठान के जैसी प्रसन्नता पूरे राष्ट्र में व्याप्त होगी ऐसी शुभेक्षा देते हुए आइए हम एक दूसरे को मकर संक्रांति की बधाई देते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।