
गुणवत्तापूर्ण कार्य से मिलती है सफलता Publish Date : 22/01/2026
गुणवत्तापूर्ण कार्य से मिलती है सफलता
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
विन्सेंट एक महानचित्रकार थे। वे चित्रकारी के दीवाने थे, पर अपने बनाए चित्रों से नाम या दाम कमाने का उनका कभी कोई उद्देश्य नहीं रहा। उनके लिए तो चित्रकारी करने में मिलने वाला आनंद ही उनके कार्यों का एकमात्र इच्छित परिणाम था। वे अपने दोस्तों को भी अपने चित्र उपहार में दे दिया करते। ऐसे दोस्तों को भी, जो उनकी पेंटिग्स की बिल्कुल कद्र नहीं करते थे। एक दिन विन्सेंट किसी पहाड़ी से सूर्यास्त देख रहे थे। यह सूर्यास्त उन्हें ऐसा भाया कि उन्होंने उसकी पेंटिंग बनाने के लिए महीनों उसी पहाड़ी पर डेरा डाले रखा।
ऐसी दीवानगी का परिणाम यह हुआ कि उनकी वह पेंटिंग अमर हो गई। उनकी इस पेंटिंग ने उन्हें रातों रात विश्वविख्यात चित्रकार बना दिया। फिर तो उनकी तमाम पुरानी पेंटिंग्स की भी मांग बाजार में होने लगी। ऊंचे-ऊंचे दामों पर वे भी बिकनी शुरू हो गईं। निश्चित ही इससे विन्सेंट के साथ-साथ उनके दोस्तों की भी चांदी हो गई। उनकी बनाई पेंटिंग्स बेचकर वे भी अमीर हो गए। कहने का तात्पर्य यह है कि सफलता कार्य करने से मिलती है और सफलता का अनुपात कार्य की गुणवत्ता पर निर्भर होता है।

कार्य की गुणवत्ता कार्य पर ध्यान देने से आती है। इसके अलावा सफलता का और कोई सार-सूत्र नहीं है। मनुष्य को असफलताएं इस गणित को न समझ पाने के कारण ही मिलती हैं।
ज़रा अपने जीवन में झांक कर देखें। किसी चीज को पाने की महत्वाकांक्षा सिर्फ एक तरह की चाह है। चाहते ही आपका ध्यान कार्य से हट जाता है, जबकि प्राप्ति कार्य करने से होती है, चाहने से नहीं। यदि आप गौर करें तो पाएंगे कि जो आप चाहते हैं, वह आपको मिलता नहीं है। जो मिल रहा है, उसे पाने की आपने कभी चाहत नहीं की थी। आपने चाही सफलता, पर मिली असफलता। आपने चाहा सुख, मिला दुख। आपने रिश्तों में चाही मधुरता, लेकिन मिली कड़वाहट।
आप अपने जीवन की असफलताओं से भी नहीं सीखना या समझना बाह रहे हैं, तो कोई बात नहीं। हो सकता है कि इसमें आपका अहंकार आड़े आ रहा हो। अपनी गलती या असफलता को स्वीकारना मनुष्य के अहंकार को रास नहीं आता।
यदि पूरी बात का सार देखा जाए तो मनुष्य की महत्वाकांक्षा ही उसकी सफलता की राह में सबसे ज्यादा बाधक है। महत्वाकाक्षाओं को ओढ़ने के चक्कर में व्यक्ति अपनी रुचि के क्षेत्र से भटक जाता है। जब रुचि के कार्य पूरी प्रज्ञा व ध्यान लगाकर किए जाते हैं, तो उसके परिणाम सुखद आते ही हैं। एक के बाद एक लगातार ऐसे कार्य किए जाने से ही मनुष्य अपने जीवन में सफलताओं के शिखर छू सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
