
ऐसे चलेगी भारत में क्रिप्टो करेंसी Publish Date : 13/01/2026
ऐसे चलेगी भारत में क्रिप्टो करेंसी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
क्रिप्टो करेंसी की लोकप्रियता व अपराध, दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं। भारत के सामने बड़ी चुनौती नवाचार को रोके बिना जोखिमों को नियंत्रित करना है। इन दिनों दो वजहों से क्रिप्टो की खूब चर्चा है- एक, कुछ वक्त से बिटक्वाइन समेत सभी क्रिप्टो करेंसियों के भाव में तेज गिरावट हो रही है। दो, खोजी पत्रकारों की एक वैश्विक जांच में पता चला है कि हवाला के जरिये बड़े पैमाने पर पैसा इधर-उधर करने में क्रिप्टो का इस्तेमाल हो रहा है।
भारत के गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने कथित रूप से पाया कि कम से कम 27 क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिये जनवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच 623.63 करोड़ रुपये दूसरे देशों में भेजे गए। इस धोखाधड़ी के पीड़ितों की संख्या लगभग 2,872 है।
सेंटर ने जांच में पता लगाया कि पैसा आतंकी फंडिंग, कोविड कोष, डार्क नेट, साइबर स्कैम, हैकिंग और हवाला से आता है। दुबई, चीन, पाकिस्तान, कंबोडिया, म्यांमार आदि देशों में बैठे अपराधी इस लेन-देन का संचालन करते हैं। हाल के वर्षों में भारत के क्रिप्टो बाजार में बढ़ोतरी हुई है। भारत में क्रिप्टो निवेश में बढ़ती दिलचस्पी को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि सक्रिय क्रिप्टो निवेशकों की संख्या दो से ढाई करोड़ के बीच है, जिनमें युवा, विशेष रूप से 18-35 वर्ष के, सबसे आगे हैं।

कुछ अनुमानों में तो यह संख्या 10 करोड़ आंकी जाती है। इसके पीछे इंटरनेट की उपलब्धता, फिनटेक स्टार्टअप का तेज विस्तार, वैश्विक क्रिप्टो एक्सचेंजों तक आसान पहुंच, सोशल मीडिया पर उपलब्ध शैक्षिक सामग्री और छोटे निवेश से शुरुआत इसकी मुख्य वजहें हैं। वित्त वर्ष. 2023-24 में सरकार को क्रिप्टो खरीद-बिक्री से 437 करोड़ रुपये आयकर के रूप में प्राप्त हुए थे, जो 2022-23 की तुलना में 63 प्रतिशत अधिक था।
भारत एसेट' के रूप में परिभाषित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक सरकार ने क्रिप्टो करेंसी को 'वर्चुअल डिजिटल (आरबीआई) ने स्पष्ट कहा है कि क्रिप्टो करेंसी को कानूनी मुद्रा के रूप में मंजूरी देने की कोई योजना नहीं है। वित्त मंत्रालय के पास क्रिप्टो परिसंपत्तियों के वित्तीय नियमन एवं कराधान का दायित्व है। आयकर विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड टैक्स चोरी या अन्य अवैध गतिविधियों की रोकथाम की जिम्मेदारी निभाते हैं।
क्रिप्टो आमदनी पर 30 प्रतिशत आयकर और हर ट्रेडिंग लेन-देन पर एक प्रतिशत टीडीएस अनिवार्य कर दिया गया है। बड़े विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज भारतीय कानून, कराधान एवं संबंधित नियमों के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। फिर भी भारत में क्रिप्टो नियमन में स्पष्टता तथा नीतिगत स्थिरता की जरूरत है। कई बार क्रिप्टो विधेयक लाने की बातें कही गई, पर अभी तक कोई ठोस कानून अस्तित्व में नहीं आया है।
क्रिप्टो एक उभरती हुई तकनीक है, इसलिए स्पष्ट कानून नहीं होने से निवेशकों व स्टार्टअप में संशय की स्थिति बनी रहती है। निवेशकों के संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से क्रिप्टो एक्सचेंज या वॉलेट में हैकिंग, धोखाधड़ी, फर्जी स्कीमें, टोकन मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं आम हो रही हैं। नीतिगत स्पष्टता से आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम में आसानी होगी। बहुत अधिक कराधान से छोटे निवेशक हतोत्साहित होते हैं। हर लेन-देन पर एक फीसदी टीडीएस से वित्तीय तरलता पर नकारात्मक असर होता है तथा निवेशक वैश्विक एक्सचेंजों की ओर पलायन करते हैं।

मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले में क्रिप्टोकरेंसी को पार्टियों को कानूनी उपायों का अधिकार मिल गया है। 'संपत्ति/प्रॉपर्टी' का एक रूप माना है, जिससे संबंधित इसका अर्थ है कि यदि क्रिप्टो संपत्ति में धोखाधड़ी या विवाद होता है, तो पीड़ित अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में अपने एक निर्णय में कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी में कुछ मूलभूत गुण भी हैं और इससे बैंकों को नुकसान नहीं पहुंचा है। उस फैसले में क्रिप्टो ट्रेडिंग को वैध करार दिया गया था।
इस वर्ष एक फैसले में संर्वोच्च न्यायालय ने कराधान व समुचित नियमन की खाई को पाटने के लिए सरकार को नियम बनाने का सुझाव दिया था। भारत सरकार और रिजर्व बैंक की अत्यधिक सतर्कता समझी जा सकती है, पर स्पष्ट नियमन समय की मांग है। यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि अत्यधिक नियमन भी न हो, जिससे इस तकनीकी नवाचार का विकास बाधित हो जाए।
बहरहाल, निवेशकों और एक्सचेंजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत भी है। भारत व अमेरिका समेत सभी देशों में क्रिप्टो अपराध और धोखाधड़ी में बढ़ोतरी हो रही है। निवेशकों को सही जानकारी, जोखिम सहने की क्षमता तथा ठोस रणनीति के साथ ही क्रिप्टो बाजार में आना चाहिए। डिजिटल रुपया जैसे प्रयोग रिजर्व बैंक के स्तर पर हो रहे हैं। भविष्य में ठोस क्रिप्टो टैक्स दरों में नरमी और निवेशक संरक्षण के प्रावधान देश के क्रिप्टो परिदृश्य को मजबूती दे सकते हैं। निवेशकों को अपनी वित्तीय सुरक्षा को देख-परख कर ही निवेश की ओर बढ़ना चाहिए। भारत में क्रिप्टो अपार संभावनाओं और जटिल चुनौतियों की कहानी है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
