राष्ट्र और धर्म की रक्षा का मार्ग आसान नहीं      Publish Date : 30/12/2025

               राष्ट्र और धर्म की रक्षा का मार्ग आसान नहीं

                                                                                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

23 दिसंबर को स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान दिवस मनाने वालों की संख्या अज्ञानतावश भले ही कम हो, लेकिन पूरा हिंदू समाज आज अपने धर्म का पालन कर पा रहा है तो यह स्वामी श्रद्धानंद जी की दूरदर्शिता और धर्म के संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयासों से ही संभव हुआ है।

श्री गुरुतेग बहादुर जी एवं चारों साहबजादों का बलिदान यह बताता रहा है कि धर्म की रक्षा का मार्ग बहुत कठिन है। वह कौन सी बात थी जिसने 6 और 8 वर्ष के साहबजादों को जिंदा दीवार में चिन दिए जाने की शक्ति प्रदान कर दी? जो निर्दयता पूर्वक यह कर रहे थे उनके मन मस्तिष्क में कौन सी बात थी जो उनसे यह जघन्य पाप करवा रही थी?

                                                                      

यह दोनों विषय विचार के हैं। हत्यारों धर्म को समाप्त करना चाहते थे लेकिन धर्म अड़ा रहा, क्योंकि उसके पीछे उम्र में छोटे लेकिन दृढ़ता में बहुत बड़े सिंह के समान दहाड़ने वाले खड़े थे। धर्म को समाप्त करने की मानसिकता और उस मानसिकता को लेकर जीने वाले मनुष्य के समान ही दिखने वाले राक्षसों से भी अधिक घृणित लोग आज भी मौजूद हैं।

अतः धर्म के लिए अपना सर्वस्व अर्पण तथा बलिदान करने वाले लोग आज भी आवश्यक हैं और अनुपात का भी ध्यान रखना होगा। दुर्भाग्य इस बात का है कि इस प्रकार के भयानक पीड़ाजनक इतिहास को समाज में जानने और इस पर चर्चा करने वालों की संख्या अत्यंत कम या नहीं के बराबर है ।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।