घृणा नहीं प्रेरणा      Publish Date : 29/12/2025

                                  घृणा नहीं प्रेरणा

                                                                                                                                                                                        प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

अपना देश अनेक वर्षों तक विदेशियों के शासन के अधीन रहा है। विदेशी शासकों ने अपने राज्य को निष्कंटक बनाने के लिए दो प्रयास किए पहले जो उनको चुनौती देते थे उन पर अमानवीय यातनाओं का प्रहार करना और दूसरे जो उनके राज्य को चलाने में सहयोग करते थे अर्थात अपने देश के साथ विश्वासघात या देशद्रोह करते थे उन्हें विभिन्न प्रकार से पुरस्कृत करना सुविधा प्रदान करना। जिन पर यातनाओं का प्रहार हुआ वे और मजबूत होते चले गए देश के लिए किसी भी परिस्थिति में स्वयं को सकारात्मक बनाए रखते हुए स्वयं को कष्ट में रखते हुए एक अच्छे भविष्य का सपना लिए पीढ़ी दर पीढ़ी कष्टों का आनंद लेते रहे। वही दूसरा वर्ग इतना सुविधा भोगी हो गया की उसे अपनी सुविधा की अतिरिक्त देश समाज की कोई चिंता ही नहीं रही क्योंकि इसी देशद्रोह के कारण तो उसे यह सुविधा मिलनी प्रारंभ हुई थी।

यह दोनों प्रकार की मानसिकता आज भी समाज में विद्यमान है, स्वयं की सुविधा के लिए राष्ट्र के विरोध तक से परहेज न करने वाला कोई व्यक्ति जब अपनी आंखों के सामने आता है तो स्वाभाविक मन में रोष उत्पन्न होता है और इसके कारण कभी-कभी वह हमारी घृणा का पात्र बनता है। इस प्रकार के लोग अपना आत्मसम्मान खो चुके होते हैं तथा अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए घृणित से घृणित कार्य करने को तत्पर रहते हैं। देश के लिए गुप्तचर बनने से लेकर अपने समाज पर हमलावर तक बनने में गुरेज नहीं करते।

                                                                                        

वास्तव में यह लोग हमारी प्रेरणा का बिंदु बनना चाहिए क्योंकि जब हम सुंदर भविष्य का स्वप्न देख रहे होते हैं तब छोटी छोटी बाधाओं के रूप में इस प्रकार के लोग दिखाई देते हैं। और इन बाधाओं को समाप्त किए बिना हमे अपना स्वप्न साकार होते दिखाई नहीं देता है अतः ऐसे स्वार्थी और सुविधा लोलुपता से युक्त व्यक्ति हमे और अधिक गति से कार्य करने को प्रेरित करता हुआ दिखाई देना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।