खुद के प्रति उदारता बरतें      Publish Date : 17/12/2025

                               खुद के प्रति उदारता बरतें

                                                                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

दिन के अंत में अगर आपको लगता है कि जितना काम करना चाहिए था, आप उतना नहीं कर पाए, तो मन में निराशा, ग्लानि या खुद पर गुस्सा आना स्वाभाविक है। लेकिन. ऐसी भावनाएं न तो आपके लिए फायदेमंद हैं और न ही आपके कॅरिअर के लिए। हर दिन एक जैसा नहीं होता, इसलिए खुद पर अनावश्यक दवाव डालने के बजाय इस वात का श्रेय खुद को दें कि आप अपनी क्षमता के अनुसार प्रयास कर रहे हैं।

बेहतर होगा कि काम को ज्यादा करने के बजाय स्मार्ट तरीके से करने पर ध्यान दें, जैसे कार्यों को प्राथमिकता देना, उन्हें छोटे हिस्सों में बांटना और दिन के अंत में यह सोचना कि आपने क्या सीखा और आगे कैसे सुधार कर सकते हैं। इससे आप अपनी भावनाओं को संतुलित रखते हुए बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए इन कुछ स्मार्ट रणनीतियों पर जरूर ध्यान दें।

कार्य पूरा होने पर खुद को सराहें

आपको अपने समय प्रबंधन को लेकर जागरूक होने की जरूरत है, जिससे आपकी कार्य उत्पादकता बेहतर हो सके। इसलिए आपको अपनी मानसिक और कार्यात्मक क्षमता की पहचान करके अपने कार्यों को निर्धारित समय के भीतर करने का एक तरीका निकालना होगा। इसके लिए बेहतर है कि आप एक समय में केवल एक ही काम करें। उन कार्यों पर ध्यान न दें, जो आपने पूरे नहीं किए, बल्कि आप उन कार्यों के लिए खुद को सराहें, जो आपने निर्धारित समय में कर लिए हैं। मैंने आज कड़ी सकारात्मक विचार पैदा करें। यह सोचें कि मैंने अच्छा काम किया और मुझे उस पर गर्व होना चाहिए।

स्थिति का मूल्यांकन करें

                                                            

जब आपको लगता है कि आप अपने सहकर्मियों का सहयोग नहीं कर पा रहे हैं और आपके बॉस कुछ कार्यों को पूरा न कर पाने को लेकर आपसे निराश हैं, तो आपको उन नकारात्मक कारकों की पहचान करने पर जोर देना चाहिए जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। इसके अलावा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने का प्रयास करें। इससें आपको यह एहसास होगा कि मैंने आज बहुत सारा काम किया और मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया।

लगातार अभ्यास है जरूरी

जब आप अपनी कल्पना के अनुसार सफल नहीं हो पाते हैं,तो आप खुद को दोषी मानने लगते हैं। इसलिए आपको उन चीजों से अलग होने की जरूरत है, जो आपके लिए कम महत्वपूर्ण हैं। कभी भी कुछ इसलिए न छोड़ें, क्योंकि आपको लगता है कि आप यह नहीं कर सकते। याद रखें कि किसी भी चीज का लगातार अभ्यास करके उसको बेहतर किया जा सकता है।

टू-डू सूची को व्यवस्थित करते रहें

जब आप अपने नकारात्मक विचारों को पहचानकर उनके आधार पर अपनी टू-डू सूची को दोबारा व्यवस्थित करने की आदत विकसित करते हैं, तो आप न सिर्फ अपने काम को बेहतर तरीके से संभालते हैं, बल्कि अपनी सीमाएं भी अधिक स्पष्ट रूप से तय कर पाते हैं। जब आप खुद अपनी अपेक्षाओं और क्षमताओं के बारे में स्पष्ट होते हैं, तो आपको यह पहचानना भी आसान हो जाता है कि सामान्य तौर पर आपके सहकर्मी और आपके बॉस आपसे क्या उम्मीद रखते 'हैं। इससे आप अनावश्यक तनाव से भी बच सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।