
बढ़ती आत्महत्या का जिम्मेदार कौन Publish Date : 11/12/2025
बढ़ती आत्महत्या का जिम्मेदार कौन
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
हाल के दिनों में कार्य के तनाव या घर के विवाद के कारण आत्महत्याओं की चर्चा होना बहुत सामान्य बात है। लेकिन हमे यह विचार अवश्य करना होगा कि मनुष्य मृत्यु को समस्याओं के अंतिम विकल्प के रूप में क्यों चुन रहा है? घर में संबंधों की कटुता और बढ़ता अविश्वास जहां पारिवारिक आत्महत्याओं का बड़ा कारण दिखाई देता है तो वहीं कार्य का तनाव बढ़ने पर किसी दबाव का सामना करने के बजाय व्यक्ति जीवन लीला को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहा है।
ऐसे में परिवार हो या कार्यस्थल व्यक्ति दोनों संस्थाओं में लगभग बराबर समय व्यतीत करता है। ऐसे में कहीं एक स्थान का दबाव प्रतिदिन दूसरे स्थान पर जाते है कम हो जाना स्वाभाविक है। सामान्यतः कार्यस्थल पर व्यक्ति तनाव में होता है, लेकिन परिवार में पंहुचते ही मानो वह फिर से रिफ्रेश हो जाता है और रिचार्ज भी। कार्यस्थल पर तनाव इसलिए है क्योंकि वहां प्रत्येक व्यक्ति अपने महत्वाकांक्षी सपने पूरे करने की दौड़ में है और इसलिए वहां उनके लिए संबंध के कोई मायने ही नहीं रह गए, अब कार्यस्थल मनुष्य की जरूरतें पूरी करने और अपने परिवार के भरण पोषण का माध्यम ही नहीं रहा है।

परिवार के भीतर की स्थिति जो परस्पर विश्वास और समन्वय की थी वहां अविश्वास असहयोग के कारण एकाकी हो गई है। जहां बहुत छोटी छोटी बातों पर झगड़े, ताने यहां तक कि हिंसा सामान्य बात हो गई है। आज यह बड़ा प्रश्न अपने मानव समाज के सम्मुख खड़ा है कि हमारे जीवन की दिशा क्या हो गई है? पैसों और भौतिक साधनों की बढ़ती अमर्यादित भूख ने हमारी संवेदनाओं को समाप्त कर दिया है जिसके कारण परिवार से लेकर नौकरी या व्यावसायिक क्षेत्र में अपने लोगों के बीच संबंधों के जीवन की सांसे फूल रही हैं और जिसके अंत के रूप में ईश्वर द्वारा प्रदत्त जीवन के असामयिक अंत के रूप में हो रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
