
अब उत्तर भारत में सर्दी धीरे-धीरे बढ़ने लगी Publish Date : 08/12/2025
अब उत्तर भारत में सर्दी धीरे-धीरे बढ़ने लगी
उत्तर भारत में सर्दी का सितम अब धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा और कुछ दिनों में ही कई जगहों पर पारा गिरकर शून्य के नीचे तक पहुंच जाने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते गलन बढ़ चुकी है, जबकि ठंडी हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है।
मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में शीत लहर चलने का भी अनुमान जताया है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम स्थित अमरनाथ यात्रा 20 कैंप में सबसे कम तापमान रविवार को 4.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जिसका अब धीरे-धीरे और कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वही हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में भी न्यूनतम तापमान 3 से 7 डिग्री के बीच पहुंच चुका है।

दिल्ली में न्यूनतम तापमान अभी 8 डिग्री दर्ज किया गया है जो कि दो-तीन दिन में और नीचे पहुंच जाएगा। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अलग-अलग हिस्सों में शीत लहर का प्रकोप अब बढ़ सकता है। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में रात का तापमान जमाव बिंदु के आसपास रह सकता है। श्रीनगर में रविवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.9 डिग्री दर्ज किया गया जो पिछली रात के मुकाबले 3.02 डिग्री अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बुधवार तक कोहरा बढ़ सकता है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी एक सप्ताह के बाद कोहरा बढ़ेगा।
हिमालय क्षेत्र में बर्फ के सुखे की बढ़ सकती है संभावना

आईआईटी जम्मू और आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों का ताजा अध्ययन हिमालय में बर्फ के सूखे की बढ़ने की चेतावनी दे रहा है। यह अध्ययन समूचे हिंदू कुश हिमालय पर आधारित है। इसमें 17 वर्षों वर्ष 1999 से 2016 के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि सर्दियों में सामान्य से कम बर्फ गिर रही है और जो बर्फ गिर भी रही है वह जल्द पिघल जा रही है। उत्तराखंड हिमालय लद्दाख और संस्कार क्षेत्र की ग्लेशियरों पर आधारित देहरादून स्थित डांडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान का अध्ययन भी यही कहानी कह रहा है।
इन क्षेत्रों में से भी बर्फ का सूखा पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। दरिया के वैज्ञानिकों ने पाया है कि उत्तराखंड के चौराहावड़ी और दुख रानी ग्लेशियर तेजी से बर्फ हो रहे हैं तो लद्दाख का पेशी लूंगप्पा ग्लेशियर भी इसी राह पर बढ़ रहा है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मनीष मेहता के अनुसार 15 से 20 सालों की अवधि में बर्फबारी के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है।
पहले बर्फबारी दिसंबर और जनवरी में होती थी, लेकिन अब फरवरी, मार्च और अप्रैल तक में बर्फबारी देखने को मिल रही है। इससे कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी होने के पैटर्न में बहुत बड़ा अंतर आया है।
