
नजरिया ही नतीजे को तय करता है Publish Date : 12/11/2025
नजरिया ही नतीजे को तय करता है
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
एक सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण बारह महान सम्पदाओं की सूची में सबसे ऊपर का स्थान रखता है, क्योंकि समस्त सम्पदाएं, चाहे वह भौतिक हों अथवा अभौतिक, यह सबसे पहले हमारे मन की स्थिति से ही शुरू होती हैं। मन ही वह एकमात्र शक्ति है, जिस पर व्यक्ति का पूर्ण और अटल नियंत्रण नहीं हो पाता है। किसी भी व्यक्ति का मानसिक दृष्टिकोण उसे वह ‘आकर्षण शक्ति’प्रदान करता है, जो कि उसे समस्त भय, इच्छाओं, शंकाओं और विश्वासों के भौतिक समकक्ष को अपनी ओर आकर्षित करती है।
यह आपका मानसिक दृष्टिकोण ही है जो यह तय करता है कि आपकी प्रार्थनाएं सकारात्मक परिणाम देंगी अथवा नकारात्मक। इसलिए हैरानी नहीं कि सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन की समस्त महान सम्पत्तियों में सबसे ऊपर का स्थान रखता है। अच्छा स्वास्थ्य ‘स्व-चेतना’से आरम्भ होता है और यह उस मन की उपज है, जो अच्छे स्वास्थ्य के सम्बन्ध में सोचता है। इसके साथ ही संयम एवं शारीरिक गतिविधियों में संतुलन सबसे अधिक आवश्यक है।
सकारात्मक दृष्टिकोण विभिन्न रोगों से बचाव का सबसे शक्तिशाली तरीका है, क्योंकि यह पूरी तरह से आपके ही नियंत्रण में है और इसे आप किसी भी इच्छित लक्ष्य की ओर निर्देशित कर सकते हैं। इसी प्रकार से राष्ट्रभाव के भी दो रूप हैं और यह दोनेां ही सामजस्य को जीवन के बारह महान गुणों में से एक मानने के लिए आवश्यक है यानी स्वयं के साथ सामजस्य करते हुए दूसरों के साथ सामजस्य स्थापित करना। इसके लिए भय पर विजय प्राप्त करना और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिससे कि व्यक्ति अपने स्वयं की प्राप्ति हेतु एक स्थाई विश्वास का सृजन कर सके। अपनी आत्मा में शांति को बनाए रखे।
इसके बाद उसे दूसरो लोगों के साथ सामजस्य की भावना के साथ जुड़ने में भी उसे कठिनाई का समाना नहीं करना पड़ेगा। मानवीय सम्बन्धों में टकराव, अक्सर व्यक्ति के भीतर व्याप्त भ्रम, निराशा, भय और सन्देह का परिणाम होता है, जो कि अक्सीर दूसरों में इन मानसिस स्थितियों को प्रतिबिम्बित करता है, जिसके चलते सामजस्य स्थापित करना असम्भव हो जाता है। दूसरे लोगों के साथ सामजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया, स्वयं के साथ सामजस्य स्थापित करने से ही शुरू होती है।
जैसा कि शेक्सपियर ने भी कहा है, ‘अपने आप के प्रति सच्चे रहो, तो तुम किसी दूसरे के प्रति झूठे हो ही नहीं सकते’। भय से मुक्त होकर व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति का उपयोग कर ऐसी समस्त अवांछित चीजों अथवा स्थितियों को नकार सकता है जो कि उसके विकास में बाधक हैं।
आशा मन की महानतम अवस्थाओं में से एक है, जो व्यक्ति को आपातकाल में भी सहारा प्रदान करती है, जब वह भय से अक्रांत हो जाता है। आशा ही उन महानतम सुखों का आधार भी है, जो किसी उद्देश्य में सफलता को प्राप्त करने की आशा से आता है। वह व्यक्ति वास्तव में दरिद्र है, जो भविष्य की ओर इस आशा से नहीं देख सकता कि वह जो बनना चाहता है, वह वैसा ही व्यक्ति बन जाएगा या अपने जीवन में वह पद प्राप्त कर लेगा, जिसको वह प्राप्त करना चाहता है। वह आशा ही है जो कि मानव की आत्मा को सतर्क और सक्रिय बनाए रखती है और संचार की उस रेखा को साफ करती है, जिसके माध्यम से विश्वास उस व्यक्ति को अनंत बुद्वि के साथ जोड़ता है।
एक सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण और आशा के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने जीवन, बल्कि आसपास के लोगों के जीवन और वतावरण में भी सकारात्मकता का संचार कर सकता है।
अपने आप पर रखें विश्वास
जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, व्यर्थ की चिंताओं के नीचे दबकर अपने जीवन के लक्ष्य से दूर हो जाते हैं। अतः कहा जा सकता है कि सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण और आशा हमारे जीवन के वह ईंधन होते हैं, जिनके बिना हम दिशाहीन हो जाते हैं। नकारात्मकता से अपने जीवन में दुःख, निराशा और भय के भाव तो उत्पन्न होते ही हैं, इससे हम दूसरों के लिए भी नकारात्मकता को बढ़ाते हैं। इसलिए अपने जीवन में सकारात्मक मानसिे दृष्टिकोण को अपनाएं और स्वयं अपने आप पर विश्वास को बनाए रखें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
