अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी सम्पन्न      Publish Date : 04/11/2026

अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी सम्पन्न

            “विज्ञान आधारित कृषि - खुशहाल किसान”

मेले की मुख्य विशेषता:

  • 140 से अधिक स्टाल लगाए गए।
  • 25 हजार से अधिक किसानों एवं कॉलेज के छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के तृतीय दिवस में समापन कुलपति, डा0 त्रिवेणी दत्त की अध्यक्षता में किया गया। माननीय कुलपति महोदय को निदेशक प्रसार डा0 सतेन्द्र कुमार ने पुष्प गुच्छ व प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया।

                     

विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 त्रिवेणी दत्त ने अपने सम्बोधन में कहा कि मेले में लगाए गए स्टालों के माध्यम से किसानों ने तकनीकी ज्ञान प्राप्त किया एवं बड़ी संख्या में किसानों एवं महिलाओं ने प्रतिभाग किया। स्टालों पर कृषि का आधुनीकरण कर कृषकों को बताया गया कि कृषि से अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जाए। कुलपति जी ने कृषि विविधीकरण को अपनाने के लिये जोर दिया और कहा कि आज अधिकांश किसान परंपरागत रूप से गेहूँ एवं धान की फसल प्रणाली पर निर्भर हैं।

इस फसल प्रणाली से खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है, लेकिन लगातार एक ही फसल चक्र अपनाने से मृदा स्वास्थ्य, जल संसाधनों तथा कृषि की लाभप्रदता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को फसल प्रणाली में बदलाव लाकर दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, बागवानी एवं अन्य कृषि उद्यमों को अपनाने की आवश्यकता है। कृषक उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने हेतु कहा कि एफ0पी0ओ0 को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिये प्रेरित करना, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन से जोड़ना आवश्यक है।

                     

निदेशक प्रसार, डा0 सतेन्द्र कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि मेले में 140 स्टाल लगाये गये थे और विश्वविद्यालय एवं अन्य बीज कम्पनियों द्वारा रू0 20 लाख से अधिक के रबी फसलों के उन्नत बीजों की बिक्री की गई। इस बार किसान मेले में लगभग 25 हजार से अधिक किसानों एवं कॉलेज के छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया। किसान मेले के आयोजन हेतु विश्वविद्यालय अथवा उत्तर प्रदेश सरकार से कोई वित्तीय सहयोग नहीं लिया गया।

डा0 बिजेन्द्र सिंह, अधिष्ठाता, उद्यान महाविद्यालय द्वारा अपने सम्बोधन में कहा कि लगातार परिवर्तित हो रही जलवायु से औद्यानिक फसलों का उत्पादन कम हो रहा हैं, जिसके लिए हमारे वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन में नई-नई तकनीकीयों का विकास कर किसानों को बता रहे है कि परिवर्तन की परिस्थितियों में भी कृषक भाई अपनी फसल से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।

                     

डा0 राजीव सिंह, अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय ने अपने सम्बोधन में कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि के अतिरिक्त पशुपालन आय प्रमुख स्त्रोत हैं। किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ उन्नत पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं अन्य पशुधन आधारित गतिविधियों को अपनाना चाहिए। इससे किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पुरस्कार वितरण समारोह

                  

पुरस्कार वितरण समारोह में मैसर्स रामकिशन एग्री इनोवेट प्रा0 लि0, मैसर्स हंस इंजीनियरिंग वर्क्स, कोरोमण्डल इेटरनेशल लिमिटेड़, क्रिस्टल क्राप प्रोटेक्शन एवं मैसर्स कृष्णा पिकल्स को ओवरॉल सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्रदान किया गया। बैंक ग्रुप में प्रथम पुरस्कार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण महाविद्यालय ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया तथा विश्वविद्यालय के बीज विक्रय केन्द्र ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।

इसी के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्रों में हस्तिनापुर, हापुड़ एवं अमरोहा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, समस्त अधिष्ठातागण, निदेशकगण एवं प्रसार निदेशालय के डा0 मुकेश कुमार, डा0 पी0के0 सिंह, डा0 एस0के0 लोधी, डा0 एस0के0 त्रिपाठी, श्री वी0पी0 सिंह, श्री एन0पी0 सिंह एवं अन्य स्टाफ का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डा0 हरिओम कटियार ने किया।

                   

कृषि विश्वविद्यालय का लक्ष्य अन्नदाता किसानों को समृद्व बनाना

मेले के समापन समारोह पर संबोधित करते हुए कुलपति डॉ॰ त्रिवेणी दत्त ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय का लक्ष्य अन्नदाता किसानों को समय पर तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना तथा उनको प्रशिक्षण देकर उनकी आय को बढ़ाना है। इस ओर विश्वविद्यालय ध्यान दे रहा है और लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी का लक्ष्य निर्धारित करते हुए संकल्प के साथ डेडिकेशन स्वीकार करना होगा तभी समय पर किसानों को लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में सेल्फ हेल्प ग्रुप एवं एसपी ओ का एक समागम करने की भी निदेशालय को निर्देश दिए कि आगामी समय में स्वयं सहायता समूह और एसपीओ का उनके उत्पादों के साथ समागम विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा।

मेले के मुख्य पंडाल में किसान गोष्ठी एवं चौपाल का आयोजन निदेशक शोध डॉ॰, कमल खिलाड़ी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने मेले में विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए एवं प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया।

निदेशक प्रसार डॉक्टर सत्येन्द्र खारी ने बताया कि इस तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में लगभग सत्तर हजार से अधिक किसानों ने भ्रमण किया तथा इस अवसर पर विश्वविद्यालय के द्वारा लगभग बीस लाख रुपए से अधिक का गेहूं, सरसों, चना आदि बीज की बिक्री की गई। विश्वविद्यालय के बीज को खरीदने में किसानों ने अत्यधिक रुचि दिखाई।