महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर के नवनियुक्त प्रथम कुलपति ने तय की प्राथमिकताएं      Publish Date : 19/10/2026

महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर के नवनियुक्त प्रथम कुलपति ने तय की प्राथमिकताएं

  • महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर को किसान-केंद्रित, शोध-आधारित एवं राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट कृषि विश्वविद्यालय बनाने की परिकल्पना-

  • डॉ. रामजी सिंह ने विश्वविद्यालय के आगामी तीन वर्षों के लिए प्रस्तुत की विकास एवं रूपांतरण की प्राथमिकताएँ-

महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि विकास, आधुनिक कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं किसान समृद्धि का अग्रणी केंद्र बनाने के उद्देश्य से डॉ. रामजी सिंह ने आगामी तीन वर्षों के लिए एक व्यापक एवं परिणामोन्मुख विकास परिकल्पना प्रस्तुत की है। इस परिकल्पना का मूल मंत्र है— “ज्ञान से विज्ञान, विज्ञान से किसान और किसान से समृद्धि।”

                                 

डॉ. रामजी सिंह, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय तथा पूर्व कुलसचिव, पूर्व अधिष्ठाता— पी.जी.एस., पूर्व निदेशक—प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट तथा पूर्व विभागाध्यक्ष—पादप रोग विज्ञान, के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना पूर्वांचल के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण उद्देश्य से हुई है। इसे साकार करने के लिए विश्वविद्यालय को एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विशिष्ट पहचान वाले संस्थान के रूप में विकसित करना आवश्यक है।

आगामी तीन वर्षों की प्रमुख प्राथमिकताएँ

1. विश्वविद्यालय की स्वतंत्र पहचान एवं सुदृढ़ प्रशासन: विश्वविद्यालय के संस्थागत विभाजन की प्रक्रिया को नियमानुसार पूर्ण करना, आधारभूत संरचना का विकास, पारदर्शी प्रशासन, डिजिटल व्यवस्था तथा समयबद्ध निर्णय प्रणाली स्थापित करना प्रमुख प्राथमिकताएँ होंगी।

2. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं उत्कृष्ट संकाय: कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, उद्यानिकी एवं वानिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, मत्स्य विज्ञान, सामुदायिक विज्ञान तथा गन्ना विज्ञान एवं तकनीकी जैसे क्षेत्रों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ किया जाएगा। योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, आधुनिक प्रयोगशालाओं और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।

3. क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान: धान, गन्ना, केला, लीची, सब्जियों, प्राकृतिक खेती, जलवायु-सहिष्णु कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैव प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सटीक कृषि जैसे क्षेत्रों में विशेष अनुसंधान कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे। शोध का उद्देश्य केवल प्रकाशन नहीं, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान होगा।

4. किसान प्रथम एवं जिला-विशिष्ट कृषि समाधान: विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र के जिलों की प्रमुख कृषि समस्याओं की पहचान कर “एक जिला–एक कृषि समाधान” कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा। किसान सेवा केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा प्रदर्शन प्रक्षेत्रों के माध्यम से मृदा परीक्षण, रोग एवं कीट निदान, मौसम आधारित सलाह, उन्नत बीज, कृषि यंत्रीकरण और बाजार संबंधी जानकारी किसानों तक पहुँचाने का प्रयास होगा।

5. कृषि नवाचार, स्टार्ट-अप एवं रोजगार: “महात्मा बुद्ध कृषि नवाचार हब” की स्थापना के माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं को कृषि उद्यमिता, तकनीकी नवाचार, स्टार्ट-अप, पेटेंट, तकनीक हस्तांतरण तथा उद्योगों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

6. उद्योग, राष्ट्रीय संस्थानों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग: कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, बीज कंपनियों, कृषि-प्रौद्योगिकी संस्थानों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग विकसित किया जाएगा। कुशीनगर की बौद्ध सांस्कृतिक पहचान का लाभ उठाते हुए बौद्ध देशों के साथ कृषि ज्ञान एवं अनुसंधान सहयोग की संभावनाएँ भी तलाश की जाएँगी।

7. आधुनिक प्रायोगिक फार्म एवं गुणवत्ता आश्वासन: विश्वविद्यालय के प्रायोगिक फार्म को ड्रोन, सेंसर, स्मार्ट सिंचाई, संरक्षित खेती, सटीक कृषि और जलवायु-स्मार्ट तकनीकों की जीवंत प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है। साथ ही, विश्वविद्यालय की पात्रता एवं लागू मानकों के अनुरूप ICAR प्रत्यायन, NAAC मूल्यांकन और राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक प्रतिष्ठा के लिए प्रारंभ से ही व्यवस्थित तैयारी की जाएगी।

प्रथम 100 दिनों में परिणामोन्मुख कार्ययोजना

दायित्व मिलने पर प्रथम 100 दिनों में विश्वविद्यालय की अकादमिक, वित्तीय, प्रशासनिक, विधिक एवं आधारभूत स्थिति का व्यापक आकलन; तीन वर्षीय रणनीतिक योजना और दस वर्षीय परिप्रेक्ष्य (पर्सपेक्टिव प्लान) योजना का निर्माण; प्राथमिकता वाले शोध कार्यक्रमों का निर्धारण; किसान प्रथम कार्यक्रम, कृषि नवाचार हब, स्मार्ट फार्म मिशन तथा डिजिटल विश्वविद्यालय पहल की शुरुआत प्रमुख कार्य होंगे। कार्यों की प्रगति एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक प्रदर्शन डैशबोर्ड विकसित करने पर भी बल दिया जाएगा।

किसान समृद्धि को केंद्र में रखकर विश्वविद्यालय का रूपांतरण

मेरी परिकल्पना है कि महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान न रहकर शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार, उद्यमिता और ग्रामीण विकास के बीच प्रभावी सेतु बने। विश्वविद्यालय का प्रत्येक प्रमुख कार्यक्रम किसानों की उत्पादकता, आय, संसाधन दक्षता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा होना चाहिए।

इस परिकल्पना का अंतिम लक्ष्य है— अगले तीन वर्षों में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों की आकांक्षाओं से जुड़ा, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा का केंद्र तथा नवाचार एवं वैज्ञानिक अनुसंधान में राष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में एक अग्रिम विश्वविद्यालय बनाना।