
खेतों की मिट्टी भी अब नशादार हो चुकी है Publish Date : 19/09/2026
खेतों की मिट्टी भी अब नशादार हो चुकी है
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अब मिट्टी भी नशादार बना दिया गया है मिट्टी को रासायनिक खादों से बचाना होगा, डाक्टर अनिल प्रकाश जोशी पर्यावरणविद
मेरठ के मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में नए छात्रों के लिए आयोजित 'दीक्षारंभ' कार्यक्रम में आज मशहूर पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी जी शामिल हुए। डॉ. जोशी ने छात्रों से बातचीत की और एक छोटे से भाषण के ज़रिए अपने जीवन और काम के अनुभव साझा किए।
डॉ. जोशी ने अपनी बात पारंपरिक खेती के तरीकों से शुरू की और आज की खेती के तरीकों और इंसानों की कृषि संबंधी ज़रूरतों से उनकी तुलना की।
उन्होंने कहा कि खेती के मौजूदा सिस्टम की वजह से इंसान गेहूं, धान जैसी कुछ फसलों के गुलाम बन गए हैं, न कि इसका उल्टा हुआ है; यानी इन फसलों को इंसानों ने पालतू नहीं बनाया है।
जानवरों के साथ भी ऐसे ही तरीकों की वजह से उनकी संख्या में भारी असंतुलन पैदा हुआ है। इंसानों के लालच और ज़रूरतों के कारण कुछ जानवरों को तो पालतू बना लिया गया, जबकि बाकियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। ऐसा आज इंसानों द्वारा खेती के तरीकों और औद्योगीकरण से पैदा हुए पारिस्थितिक असंतुलन की वजह से हो रहा है।
हम रोज़ाना प्रकृति पर इसके असर का सामना कर रहे हैं, जैसे हाल ही में तिब्बत और नेपाल क्षेत्र में ग्लेशियर की घटना हुई।
डॉ. जोशी ने ज़ोर देकर कहा कि "पारिस्थितिकी (Ecology) के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो सकती।"
हम प्रकृति में कई तरह के प्रदूषण का सामना कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से इंसानी गतिविधियों, जैसे कीटनाशकों के बेतहाशा और अनियंत्रित इस्तेमाल और खेती की ज़मीन को तेज़ी से कम करने की वजह से हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके महत्व को देखते हुए सभी राज्य सरकारों को खेती के लिए बड़ी ज़मीन अलग रखनी चाहिए और उसकी सुरक्षा वैसे ही करनी चाहिए जैसे वे वन भूमि की सुरक्षा करती हैं।
अंत में, डॉ. जोशी ने अपनी बात का सार यह बताते हुए रखा कि आज हम खेती नहीं, बल्कि एग्री-बिज़नेस (कृषि-व्यवसाय) कर रहे हैं। हमारी खेती के तरीकों में अब कोई 'संस्कृति' नहीं बची है। हमें अपने पारंपरिक तरीकों की ओर लौटना होगा और खेती में फिर से संस्कृति को लाना होगा। ऐसा करने के लिए हमें सबसे पहले पानी को बचाना होगा। बाकी चीज़ें अपने आप बन जाएँगी और प्रकृति को अपने आप सहारा देंगी।
इस मौके पर डॉ. वी. के. सिंह, डॉ. आर. एस. सेंगर, डॉ. रेखा दीक्षित, डॉ. बुधयश गौतम और अन्य लोग मौजूद थे। इस कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ वीके सिंह ने स्वागत किया।
निदेशक ट्रेनिंग प्लेसमेंट डॉ आर एस सेंगर धन्यवाद प्रस्ताव संचालन, प्रोफेसर रेखा दीक्षित द्वारा किया गया इस अवसर पर डॉ डी के सिंह अधिष्ठाता, डीन पीजी, डॉक्टर एल बी सिंह, डॉक्टर वी के सिंह, डॉक्टर विपुल गुप्ता, डॉ बुधेश गौतम, डॉक्टर वी के सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
