
भारतीय बाजारों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल 10\% की बढ़ोतरी Publish Date : 31/08/2026
भारतीय बाजारों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल 10% की बढ़ोतरी
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वैश्विक आपूर्ति की चिंता और कमजोर बारिश से चीनी के दाम चढ़े, भारत में एक महीने में करीब 10% की बढ़ोतरी
वैश्विक और भारतीय बाजारों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है। प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन को लेकर चिंता और 2026-27 सीजन में वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी की आशंका ने कीमतों को समर्थन दिया है। बाजार में तेजी बनी हुई है। कच्ची चीनी (Raw Sugar) की कीमत बढ़कर एक साल के उच्चतम स्तर 16.6 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई है। वहीं, सफेद चीनी की कीमत भी 15 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। भारत में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
बाजार से जुड़े कारोबारी और विशेषज्ञ ब्राजील, थाईलैंड और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। अक्टूबर-सितंबर 2026-27 सीजन में वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी (शुगर डेफिसिट) रहने की आशंका ने कीमतों पर और ऊपर की ओर दबाव बढ़ाया है। घरेलू बाजार में मुंबई में चीनी के भाव फिलहाल 5,000 से 5,090 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बताए जा रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, कम बारिश की चिंता ने चीनी की कीमतों में अतिरिक्त प्रीमियम जोड़ दिया है। इसके अलावा आगामी त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने की उम्मीद भी कीमतों को समर्थन दे रही है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार ने पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए निगरानी एवं नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि, बिक्री पूरी होने के सात दिनों के भीतर चीनी का स्टॉक भेजना (डिस्पैच करना) अनिवार्य होगा। यह आदेश 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
सरकार के अनुसार, कुछ मामलों में चीनी मिलें महीने की शुरुआत में बिक्री पूरी कर लेती थीं, लेकिन स्टॉक की आपूर्ति महीने के अंत तक टाल देती थीं। सरकार का कहना है कि इस तरह की देरी से कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है और सट्टेबाजी के लिए खरीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। निर्देश का पालन नहीं करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
