'लैब टू लैंड' की अवधारणा बढ़ाएगी आय      Publish Date : 23/07/2026

    'लैब टू लैंड' की अवधारणा बढ़ाएगी आय

गुजरात विस अध्यक्ष व एशिया की सबसे बड़ी डेरी बनास के चेयरमैन
का आह्वान, कृषि व डेरी में यूपी नए की अपार संभावनाएं गिनाई-
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में 'लैब टू लैंड' (प्रयोगशाला से खेत तक) की अवधारणा को केंद्रीय संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया। गुजरात विधानसभा अध्यक्ष और एशिया की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी बनास बनास के चेयरमैन शंकरभाई चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कृषि के नवस्नातकों से आग्रह किया कि वे नौकरी की तलाश करने के बजाय कृषि, डेयरी और सहकारिता के क्षेत्र में उद्यमिता को अपनाएं और रोजगार सृजन करें।

शंकरभाई चौधरी ने उत्तर प्रदेश को कृषि और डेयरी के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला राज्य बताया। उन्होंने कहा कि यदि 'लैब टू लैंड' माडल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो किसानों की आय में
1X5 उल्लेखनीय वृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय के 50 से अधिक छात्र-छात्राओं का चयन अमूल परिवार में हुआ है और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए भविष्य में भी उत्तर प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का लगभग 33 प्रतिशत आलू उत्पादन करता है, लेकिन प्रोसेसिंग योग्य किस्मों का उत्पादन अभी बहुत कम है। यदि प्रोसेसिंग वैरायटी, गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की आय और कृषि निर्यात दोनों में बड़ी वृद्धि हो सकती है। उन्होंने मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन बढ़ाने और टिश्यू कल्चर तथा एरोपोनिक तकनीक से बीज उत्पादन को कृषि की नई दिशा बताया।

डेयरी क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि प्रदेश में प्रत्येक गाय और भैंस का दूध उत्पादन केवल एक लीटर प्रतिदिन बढ़ जाए, तो किसानों की आय में प्रतिवर्ष करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन नौ करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा प्रोसेसिंग से बाहर है।

इस संदर्भ में डेयरी प्रसंस्करण और सहकारिता के क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने गुजरात की बनास डेयरी का उदाहरण देते हुए बताया कि पाकिस्तान और राजस्थान की सीमा से लगे सूखा प्रभावित बनास कांठा जिले में भूजल 1200 फीट नीचे है। वहां आज प्रतिदिन 87 लाख लीटर दूध का संग्रह हो रहा है। इस माडल से जिले की महिलाओं के खातों में प्रतिदिन 45 करोड़ रुपये, यानी हर महीने 1300 करोड़ रुपये से अधिक की आय पहुंच रही है। कम पढ़ी-लिखी महिलाओं ने भी सहकारिता और नवाचार के माध्यम से करोड़ों रुपये की आय अर्जित की है।