कृषि विश्वविद्यालय में 19वां दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न      Publish Date : 20/07/2026

कृषि विश्वविद्यालय में 19वां दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न

  • कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने पर कार्य करना होगा

अनपढ़ होने के बावजूद कड़ी मेहनत करके करोड़ों रुपये कमा रही हैं। लोगों को इन महिलाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए……………….श्रीमती आनंदीबेन पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में दिनांक 20 जुलाई 2026 को 19वें दीक्षांत समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति माननीय श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने समारोह की अध्यक्षता की। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष एवं बनास डेयरी के चेयरमैन श्री शंकरभाई चौधरी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, विशिष्ट अतिथि के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र श्री अतुल धीरज लाल पटेल ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई।

            

दीक्षांत समारोह में कुल 450 छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की गईं। स्नातक स्तर पर बीएससी (कृषि) ऑनर्स के 114, बीएससी (हॉर्टिकल्चर) ऑनर्स के 39, बीटेक (बायोटेक्नोलॉजी) के 62, बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) के 19, बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) के 24, बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) के 16 तथा बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री के 53 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर स्तर पर 65 तथा पीएच.डी. के 58 शोधार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं।

               

बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री के छात्र आशुतोष शर्मा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चांसलर गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में शिवम यादव को स्वर्ण, अतुल कुमार को रजत तथा आंचल पुंडीर को कांस्य पदक प्रदान किया गया। कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर में मान्या सिंह को स्वर्ण, श्वेता तिवारी को रजत तथा नमन पटेल को कांस्य पदक दिया गया। बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री में आशुतोष शर्मा को स्वर्ण, हर्षिका बाजपेयी को रजत तथा निशांत मेन्डीराता को कांस्य पदक प्रदान किया गया। बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) में हर्ष शर्मा को स्वर्ण, नितेश कुमार को रजत तथा राज कश्यप को कांस्य पदक प्रदान किया गया।

            

इसी प्रकार बीटेक (बायोटेक्नोलॉजी) में खुशी गुप्ता को स्वर्ण, मोनाली रथ को रजत तथा अनुशिका विद्या को कांस्य पदक दिया गया। बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) में निधि को स्वर्ण, अपूर्वा चौधरी को रजत तथा प्रियांशुकशाना को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) में अमन वर्मा को स्वर्ण, यश राजपूत को रजत तथा अंकुर लता पांडे को कांस्य पदक प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त 4 विद्यार्थियों को प्रायोजित पदक भी प्रदान किए गए, जिनमें मान्या सिंह (बीएससी हॉर्टिकल्चर) को जावित्री देवी मेमोरियल गोल्ड मेडल, हर्ष शर्मा (बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) को शशिपाल सिंह मेमोरियल गोल्ड मेडल, निधि (बीटेकफूड टेक्नोलॉजी) को प्रो. शमशेर गोल्ड मेडल तथा खुशी गुप्ता (बीटेकबायोटेक्नोलॉजी) को सरिता मेमोरियल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

                    

दीक्षांत समारोह में बेस्ट टीचर अवार्ड डॉ. एल. के. गंगवार को तथा आउटस्टैंडिंग वुमन टीचर अवार्ड प्रो. वैशाली (कृषि जैव प्रौद्योगिकी) को प्रदान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय राज्यपालआनंदीबेन पटेल।ने संबोधित करते हुए कहा कि हम सब साथ चलें, साथ विचार करें और हमारे संकल्प एक हों, दीक्षांत समारोह का यह अवसर भी हमें सामूहिक संकल्प, ज्ञान, साधना और लोक कल्याण की इसी भावना से जोड़ता है। उन्होंने कहा, यह विश्वविद्यालय के केवल उच्च शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में कृषि चेतना, पश्चिमपालन विकास, ग्रामीण उद्यमिता, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक नवाचार और किसान कल्याण का एक सशक्त ज्ञानदीप है।शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के माध्यम से किसानों, पशुपालकों, युवाओं, ग्रामीण महिलाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान एवं तकनीक पहुंचाने का विश्वविद्यालय का प्रयास अत्यंत सराहनीय है

              

राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपके हाथों में अपनी उपाधि केवल एक प्रमाण पत्र नहीं बल्कि आपके परिश्रम, गुर्जों के मार्ग, दर्शन, माता पिता के त्याग और आपके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि अपने ज्ञान, कौशल और संस्कारों का उपयोग अपने व्यक्तिगत उन्नति के साथ-साथ किसान, गाँव, समाज और राष्ट्र की सेवा में करेंगे। उन्होंने कहा कि वही विद्या है जो जीवन को अज्ञान, अभाव और सीमाओं से मुक्त करे।इसी भाव के साथ यह दीक्षांत समारोह विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला प्रेरणादायी अवसर है जब हमारे युवा ज्ञान, विज्ञान, नवाचार, नैतिकता और सेवा भावना को अपने जीवन का आधार बनाएंगे। आत्मनिर्भर भारत मिशन शक्ति, स्टार्टअप एवं नवाचार, डिजिटल कृषि, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और किसान कल्याण जैसे राष्ट्रीय संकल्प की सफलता में आपकी सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इसरो में अनुसंधान कार्य केवल संस्थान तक सीमित न रहकर विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों एवं छात्रों को आपस में जोड़कर किया जाता है। इसी प्रकार बानस डेयरी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी आपस में जोड़ा गया है, जिससे वे अपने-अपने संस्थानों में शोध एवं नवाचार के कार्य को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने आगे कहा कि “जोड़कर सिखाने” की प्रक्रिया छोटे-छोटे समूहों से प्रारंभ करना एक प्रभावी तरीका है, जो लोगों को सही दिशा प्रदान करता है। प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य भिन्न हो सकता है, लेकिन समन्वय और सहयोग के माध्यम से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि विभिन्न क्षेत्रों में सुधार हो रहा है, फिर भी सभी को सरकारी नीतियों एवं सोच के अनुरूप कार्य करना आवश्यक है। साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुँचे। उन्होंने प्रेरणादायक उदाहरण देते हुए कहा कि कई महिलाएँ अशिक्षित होने के बावजूद कठिन परिश्रम से करोड़ों रुपये तक कमा रही हैं, अतः ऐसे उदाहरणों से प्रेरणा लेकर कार्य करना चाहिए। किसानों की आय वृद्धि के लिए उन्होंने गन्ना एवं आलू जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अन्य फसलों को भी शामिल करने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि दीक्षांत समारोह को “दीक्षोत्सव” के रूप में मनाया जाना चाहिए, जो कम से कम 15 दिनों तक संचालित हो। इस अवधि में किसानों, महिलाओं तथा ग्रामीण बच्चों को जोड़कर विभिन्न रचनात्मक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

            

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि शंकरभाई चौधरी अध्यक्ष, गुजरात विधानसभा अध्यक्ष एवंबनास डेयरी पालनपुर, गुजरात ने संबोधित करते हुए कहा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि भारत की विकास यात्रा को नवाचार और प्रौद्योगिकी से सशक्त बनाया जाना चाहिए। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण है कि आधुनिक डिजिटल तकनीकों का लाभ देश के प्रत्येक किसान तक पहुंचना चाहिए ताकि वे अधिक सूचित निर्णय ले सकें। जोखिमों को कम कर सकें, उत्पादकता बढ़ा सकें तथा अपनी आय में वृद्धि कर सकें। कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण न केवल देश की खास सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत उत्पादन प्रणालियों जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान में भी सहायक सिद्ध होगा।

विशिष्ट अतिथि  माननीय अतुल भाई धीरज लाल पटेल सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र ने संबोधित करते हुए कहा कि आज छात्र डिग्री लेने के उपरांत कृषि क्षेत्र में ही नहीं, अन्य क्षेत्रों में भी कार्य करने के लिए आगे बढ़ सकेंगे उन्होंने कहा, जैसे ही आप इस विश्वविद्यालय से स्नातक होकर जीवन की नई यात्रा प्रारंभ करते हैं तो आपके सामने अनेक चुनौतियां और अवसर होंगे। इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए आवश्यक है कि हम अपने अतीत से सीखें, अपने महान नेताओं के विचारों और त्याग का सम्मान करें तथा भारत सरकार के विकसित भारत के संकल्प को समर्पित होकर कार्य करें। उन्होंने कहा, बड़े सपने देखें, नवाचार को अपनाएं और अपनी सृजनात्मक शक्ति का उपयोग किसानों और समाज के उत्थान के लिए करें

                

माननीय मंत्री कृषि, कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान सूर्यप्रताप शाही ने संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर हर्ष, गौरव और आत्म संतोष का है। इस पावन अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामनाएं दीं। कृषि मंत्री कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के सामने अवसरों का एक विस्तृत क्षितिज उपस्थित है, चाहे आपकी रुचि कृषि अनुसंधान में हो, कृषि उद्यमिता में जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन प्रौद्योगिकी, जलवायु अनुकूलन, कृषि अथवा डिजिटल कृषि विस्तार में उत्तर प्रदेश सरकार एक ऐसा सशक्त नवाचार प्रस्तुति की तंत्र विकसित कर रही है जहां आपके विचारों को आकार लेने और सफलता प्राप्त करने के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह करते हुए कहा कि केवल रोजगार प्राप्त करने की आकांक्षा तक स्वयं को सीमित न रखें बल्कि नवाचार के बाहर उद्यमी तथा रोजगार सृजन करता बनने का संकल्प लें। आपका ज्ञान किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बने। आपके अनुसंधान कृषि की नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करें।

माननीय राज्य मंत्री कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान बलदेव सिंह औलख ने संबोधित करते हुए कहा सच्चा ज्ञान वही है जो समाज के कल्याण और परोपकार में समर्पित हो। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी इसी भावना के साथ राष्ट्र, समाज और कृषि क्षेत्र के विकास में अपना अमूल्य योगदान देंगे। उन्होंने पदक पाने वाले छात्र छात्राओं को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की

            

कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ॰ त्रिवेणी दत्त ने दीक्षांत समारोह में सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्षों में किए गए शिक्षा, शोध एवं अनुसंधान के कार्यों को रखा विश्वविद्यालय द्वारा नए डिग्री कोर्स प्रारंभ किए जाने की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान तथा संस्कार युक्त मानव संसाधन के निर्माण हेतु निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान में, विश्वविद्यालय अपने सात संगठक महाविद्यालयों के माध्यम से कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रमों को संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में लगभग 133 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न आधारभूत संरचना विकास परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इनमें दस छात्रावासों के नवीनीकरण के साथ-साथ एक आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं 20 बेड के अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है। इसके अतिरिक्त तीन नए छात्रावासों का निर्माण, ऑडिटोरियम, इनक्यूबेशन सेंटर, खेल स्टेडियम तथा विद्युत अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण जैसे कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर बालकृष्ण जी एव कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ॰ त्रिवेणी दत्त ने हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते के माध्यम से कृषि, आयुर्वेद एवं संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त शोध, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

        

कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव डॉ. वी. पी. सिंह एवं श्रीमती प्रमिला उमराव द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री श्री सोमेन्द्र तोमर, राज्य मंत्री श्री बलदेव सिंह औलख, एमएलसी श्री धर्मेन्द्र भारद्वाज, पूर्व सांसद श्री राजेन्द्र अग्रवाल एवं डॉ. संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरव चौधरी, श्री सुनील भराला तथा प्रबंध परिषद के सदस्यगण उपस्थित रहे।