
कृषि मौसम परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ Publish Date : 24/06/2026
कृषि मौसम परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ
मेरठ में कृषि मौसम सेवाओं पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), नई दिल्ली तथा सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “कृषि मौसम परामर्श सेवाएं (Agromet Advisory Services) अंतर्गत जीकेएमएस प्रशिक्षण कार्यक्रम”का मंगलवार को कृषि विश्वविद्यालय परिसर में शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली के एग्रोमेट एडवाइजरी सर्विसेज प्रभाग के प्रमुख डॉ. शेषा कुमार गोरोशी ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों तक समय पर मौसम आधारित वैज्ञानिक सलाह पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। कृषि मौसम सेवाएं किसानों को मौसम जनित जोखिमों से बचाने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग किसानों के हित में करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक कुमार ने की। उन्होंने कहा कि कृषि एवं मौसम विज्ञान का समन्वय ही जलवायु-स्मार्ट कृषि का आधार है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि मौसम वैज्ञानिकों एवं तकनीकी अधिकारियों की क्षमता वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। अधिष्ठाता स्नातकोत्तर डॉ डी के सिंह तथा निदेशक डॉ आर एस सेंगर ने भी खेती किसानी में मौसम परामर्श सेवा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु अपनी शुभकामनाएं एवं आशीर्वचन प्रेषित करते हुए कहा कि कृषि मौसम सेवाओं का सुदृढ़ीकरण किसानों की खेती में लागत कम करने तथा टिकाऊ कृषि विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारत मौसम विज्ञान विभाग एवं विश्वविद्यालय के बीच इस महत्वपूर्ण सहयोगात्मक पहल की सराहना की।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. यू.पी. शाही, नोडल अधिकारी, कृषि मौसम सेवा (GKMS) एवं अध्यक्ष, मृदा विज्ञान विभाग ने बताया कि इस प्रशिक्षण में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखण्ड तथा उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए 30 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कृषि मौसम बुलेटिन निर्माण, निर्णय सहायता प्रणाली (DSS), प्रभाव आधारित पूर्वानुमान, उन्नत एग्रोमेट उपकरणों के उपयोग तथा स्थान-विशिष्ट किसान परामर्श जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर भारत मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. लता विश्नोई एवं डॉ. प्रियंका सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा प्रशिक्षण के तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों की उपस्थिति रही। अंत में डॉ. विकास सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 25 जून तक चलेगा, जिसमें कृषि मौसम सेवाओं को अधिक प्रभावी, सटीक एवं किसानोन्मुख बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।
