
“मिलेट टू मार्केट: प्रोसेसिंग, गुणवत्ता मूल्यांकन एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण” का सफल समापन Publish Date : 10/06/2026
“मिलेट टू मार्केट: प्रोसेसिंग, गुणवत्ता मूल्यांकन एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण” का सफल समापन
10 दिवसीय युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम “मिलेट टू मार्केट: प्रोसेसिंग, गुणवत्ता मूल्यांकन एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण” का सफल समापन
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में “Enhancement of Production and Value Added Products of Sorghum (Sorghum bicolor L. Moench)” परियोजना (उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद - वित्तपोषित) के अंतर्गत आयोजित 10 दिवसीय हस्त-प्रशिक्षण (Hands-on Training Programme) “Millet to Market: Training on Processing, Quality Evaluation and Value Addition” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 01 जून से 10 जून, 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न जनपदों से आए युवाओं, विद्यार्थियों एवं उद्यमिता में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को मोटे अनाजों (मिलेट्स), विशेषकर ज्वार (सोरघम), के प्रसंस्करण, गुणवत्ता मूल्यांकन, मूल्य संवर्धन तथा विपणन संबंधी व्यावहारिक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना था, जिससे वे स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का लाभ उठा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मिलेट आधारित विभिन्न उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण तकनीकों, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, खाद्य सुरक्षा मानकों तथा विपणन रणनीतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा मिलेट क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वी. पी. सिंह, निदेशक अनुसंधान, निदेशक प्रसार, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता, पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी एवं फूड प्रोसेसिंग महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. वी. पी. सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मिलेट्स केवल पोषण का स्रोत ही नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता के सशक्त माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं से अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग कर मिलेट आधारित स्टार्टअप एवं उद्यम स्थापित करने तथा समाज में पोषण जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा युवाओं के कौशल विकास हेतु निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

कार्यक्रम निदेशक एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. पूरन चन्द ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 01 से 10 जून 2026 तक आयोजित इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मिलेट प्रसंस्करण, गुणवत्ता मूल्यांकन, मूल्य संवर्धन, उत्पाद विकास, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, खाद्य सुरक्षा मानकों, उद्यमिता विकास तथा विपणन प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं उद्यमशील बनाना है।
पाठ्यक्रम समन्वयक एवं सह-अन्वेषक डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षण की प्रमुख उपलब्धियों एवं प्रतिभागियों द्वारा विकसित विभिन्न मिलेट आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यानों, प्रयोगशाला अभ्यासों, उत्पाद निर्माण प्रदर्शन तथा उद्यमिता उन्मुख गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं संचालन में डॉ. अतर सिंह, डॉ. श्वेता यादव, डॉ. अजीत कुमार सिंह तथा आद्या सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने प्रशिक्षण समन्वय, तकनीकी सत्रों के संचालन, प्रतिभागियों के मार्गदर्शन एवं विभिन्न आयोजन व्यवस्थाओं का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
कार्यक्रम के समन्वयकों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया तथा मिलेट आधारित उत्पाद विकास एवं मूल्य संवर्धन की तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखा। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए विश्वविद्यालय एवं परियोजना दल के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को मिलेट आधारित उद्यमिता, पोषण सुरक्षा एवं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध हुआ।
