
राज्यपाल, आनंदीबेन पटेल ने कृषि विवि, मेरठ की समीक्षा बैठक की Publish Date : 09/05/2026
राज्यपाल, आनंदीबेन पटेल ने कृषि विवि, मेरठ की समीक्षा बैठक की
राज्यपाल व राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की लखनऊ में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय को केवल शिक्षण संस्थान ही नहीं है, बल्कि किसानों और युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का केंद्र बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रयोगशालाओं तक सीमित रहने के बजाय किसानों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तैयार कर उन्हें बाजार से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए और इस दिशा में तेजी से कार्य करना होगा। राजपाल महोदया ने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल डिग्री प्रदान करना नहीं बल्कि उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन तक सक्रिय भागीदारी निभाना भी है।
उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने गर्ल्स छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए। छात्र छात्राओं की गतिविधियों पर नियमित निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और छात्राओं से संवाद बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।

प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विश्वविद्यालय तथा उसके अंतर्गत संचालित विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों, शैक्षिक एवं गैर-शैक्षणिक फैकल्टी, अनुसंधान गतिविधियों, रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, बेस्ट प्रैक्टिस, विद्यार्थी कल्याण, आधारभूत सुविधाओं, भवनों की स्थिति, विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, प्रगति रिपोर्ट, खेलकूद एवं सामाजिक गतिविधियों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल महोदया ने कहा कि किसी भी कार्य का परिणाम महत्वपूर्ण होता है तथा विश्वविद्यालयों को अपने कार्यों के ठोस परिणाम समाज के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन तक उसकी सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि निजी कंपनियों को आमंत्रित कर विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि जिस लक्ष्य के साथ कार्य प्रारम्भ किया जाए, उसे पूर्णता तक पहुंचाना आवश्यक है। राज्यपाल महोदया ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना एवं सरकार की अन्य योजनाओं से जोड़ने, विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने तथा ऐसे विद्यार्थियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए जिन्हें रोजगार अथवा उद्यम स्थापना हेतु वित्तीय सहयोग की आवश्यकता हो।
राज्यपाल महोदया ने ऐसे फल एवं सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जिनका उत्पादन प्रदेश में कम होता है। उन्होंने कहा कि आय सृजन के लिए यूनिक एवं उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों का उत्पादन आवश्यक है। उन्होंने परंपरागत उत्पादों की प्रोसेसिंग के साथ नए उत्पाद विकसित करने तथा फलों एवं सब्जियों के अपव्यय को रोकते हुए उन्हें उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को किसानों की समस्याओं को कम करने की दिशा में व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने चाहिए।
बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमि, नक्शा, सीमांकन एवं अतिक्रमण हटाने के विषय पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल महोदया ने निर्देश दिए कि जिन कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमि विश्वविद्यालय के नाम पर दर्ज नहीं है, उन्हें विश्वविद्यालय के नाम दर्ज कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं। राज्यपाल महोदया ने विश्वविद्यालय के गर्ल्स छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्ल्स एवं ब्वॉइज छात्रावास के कमरों को व्यवस्थित रखने तथा छात्र-छात्राओं द्वारा पेंटिंग एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि चीफ वार्डन सक्रिय भूमिका निभाएं तथा कुलपति एवं संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि छात्र-छात्राएं किसी गतिविधि या खेलकूद हेतु बाहर जा रहे हैं तो कितने छात्र जा रहे हैं और कहां जा रहे हैं। उन्होंने छात्रावास में छात्राओं के विलंब से लौटने पर विशेष निगरानी रखने तथा अध्यापिकाओं को छात्राओं से नियमित संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझने के निर्देश दिए।
राज्यपाल महोदया ने जन भवन में संचालित नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां पॉक्सो एक्ट से प्रभावित बच्चियों को सिलाई एवं अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने छात्राओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं हीमोग्लोबिन जांच पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने मेरठ में उत्पादित खेल सामग्री उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के उद्योगों एवं उद्यमों से सीएसआर फंड प्राप्त कर विकासात्मक कार्यों को गति दी जा सकती है। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, बहुफसली खेती को प्रोत्साहित करने तथा आयात कम एवं निर्यात अधिक करने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को आंकड़ों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित कर किसानों को उत्पादन के लिए प्रेरित करना चाहिए तथा अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गन्ना उत्पादन के लिए उपयुक्त बताते हुए राज्यपाल महोदया ने कहा कि गन्ने के साथ-साथ अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने तथा समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तय करने पर बल दिया।
राज्यपाल महोदया ने जन भवन में संचालित नवाचारों की चर्चा करते हुए कहा कि झोपड़पट्टी एवं गरीब परिवारों के बच्चों का यहां संचालित विद्यालय में नामांकन कराया गया है। उन्होंने बताया कि जन भवन के कार्मिक एवं सुरक्षाकर्मी स्वेच्छा से ड्यूटी समय के बाद बच्चों को खेल प्रशिक्षण, बैंड एवं बांसुरी वादन का प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। उन्होंने जन भवन में होने वाले पौधारोपण, गरबा, नाटक, संविधान पर चर्चा एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा एवं गुण होता है, आवश्यकता केवल उन प्रतिभाओं को पहचानकर निखारने की है।
