कृषि वैज्ञानिक एवं जन शरणम एनजीओ की टीम के द्वारा सकौती चीनी मिल के क्षेत्र के गाँवों का दौरा      Publish Date : 02/04/2026

कृषि वैज्ञानिक एवं जन शरणम एनजीओ की टीम के द्वारा सकौती चीनी मिल के क्षेत्र के गाँवों का दौरा

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं जन जनसणम एनजीओ नई दिल्ली के टीम के सदस्यों ने सकौती चीनी मिल के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसानों को बताया कि बीमारी के कारण गन्ने की प्रजाति 0238 बुरी तरह से प्रभावित हो रही है जिससे किसानों के सामने उत्पादन और आय दोनों का संकट खड़ा हो गया है, इसलिए इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने कोयंबटूर ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट के करनाल सेंटर पर तैयार गन्ने की प्रजाति 0118 की बुआई करने की सलाह दी। बसंतकालीन गन्ना बुआई महाभियान के तहत जन शरणम एनजीओ नई दिल्ली ने लगभग 13 गांवों में संपर्क कर नई प्रजातियाँ बोने की सलाह दी।

विश्ववि़ालय के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर ने बताया की गन्ने की फसल में ट्राइकोडरमा एक एक जैविक फफूंद नाशी है, जो भूमजनित रोगों को नियंत्रित करने में सहायक है। यह जड़ों के विकास को प्रोत्साहित करता है तथा मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार करता है। इस दौरान किसानों को नवीन कृषि तकनीक, उन्नत बुआई विधियों एवं फसल प्रबंधन से संबंधित प्रचार सामग्री भी वितरित की गई। वैज्ञानिकों तथा अन्य लोगों ने चीनी मिल द्वारा चलायी जा रही विकास योजनाओं के बारे में भी किसानों को अवगत कराया। किसानों से अपील की गई कि वे बसंतकालीन गन्ना बुवाई में नवीन एवं उच्च उत्पादकता वाली किस्मों जो कि मिल द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, का उपयोग करके अपने खेत की उत्पादक क्षमता को बढ़ाएं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।

जनशरणम के मैनेजिंग डायरेक्टर रामांशु वर्मा ने कहा कि उनका प्रयास है कि किसानों को वैज्ञानिक एवं तकनीक ज्ञान समय से उपलब्ध कराए जाएँ, जिससे किसान उसको अपनाकर अपनी गन्ने की खेती की उपज बढ़ा सकें। साथ-साथ मृदा की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकें। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम के दौरान जन शरणम् एनजीओ के रमांशु वर्मा, ऋचा श्रीवास्तव, अन्नम क्षमा, अभिनव, श्री रंजन फेज, ए अनीस, सौरभ आदि लोगों का सहयोग रहा।