
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में बागवानी क्षेत्र की भूमिका अहम Publish Date : 07/02/2026
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में बागवानी क्षेत्र की भूमिका अहम
कृषि विविधीकरण कर फल फूल और सब्जियों का उत्पादन पर दिया जाए अधिक ध्यान
-कुलपति डॉक्टर त्रिवेणी दत्त
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आज कुलपति ने कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर का निरीक्षण किया, वहां पर चल रहे शोध कार्यों का अवलोकन किया। कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर में उन्होंने हाईटेक नर्सरी, जिसमें लौकी, खीरा, बैंगन और टमाटर का उत्पादन किया जा रहा है, उसका अवलोकन किया। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक तकनीक द्वारा सलाद पत्ता एवं वर्टिकल फार्मिंग द्वारा स्ट्रॉबेरी के उत्पादन को देखा। हर्बल गार्डन गार्डन का भ्रमण करने के दौरान कुलपति ने और अधिक हर्बल पौधों का उत्पादन करने और इसको पौधों को न्यूनतम दर पर किसानों को उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए।

डॉक्टर त्रिवेणी दत्त ने बताया कि भारत में हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स की मांग लगातार बढ़ रही है, जो किसान कृषि के विविधीकरण को अपनाकर हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स का अपनी खेती में समावेश कर लिए हैं, उनकी आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यह क्षेत्र दिल्ली के पास होने के कारण सब्जी फल फूल की मांग और रेट भी अच्छे यहां पर किसानों को मिल सकते हैं। इसलिए उनको इस और भी ध्यान देना होगा।
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि भारत में बागवानी (हॉर्टिकल्चर) की वर्तमान स्थिति अत्यंत सशक्त और आशाजनक है। फल, सब्ज़ी, फूल, मसाले और औषधीय पौधों के उत्पादन में भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। आज बागवानी क्षेत्र कृषि उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। सीमित भूमि में अधिक उत्पादन, कम समय में बेहतर लाभ और निर्यात की व्यापक संभावनाएँ इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं। आधुनिक तकनीकों, संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उपयोग से उत्पादन एवं गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
बागवानी से पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में बागवानी क्षेत्र की भूमिका निरंतर बढ़ रही है।
