अब राज भवन को जन भवन के नाम से जाना जाएगा      Publish Date : 22/01/2026

     अब राज भवन को जन भवन के नाम से जाना जाएगा

उत्तर प्रदेश की राजपाल आनंदीबेन पटेल का आधिकारिक आवास अब “जन भवन” के नाम से जाना जाएगा। राज भवन का नाम बदलकर तत्काल प्रभाव से “जन भवन” कर दिया गया है। माना जा रहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सचिवालय का नाम पहले से ही लोक भवन होने के कारण दूसरे प्रदेशों की तरह यहां के राज भवन का नाम लोक भवन न करके “जन भवन” कर दिया गया है।

ओपनिवेशन मानसिकता को खत्म करने के उद्देश्य और शासन को जन केंद्रित बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा राज्यपालों के आधिकारिक आवासों के नामांकन के मानकीकरण के संबंध में पिछले वर्ष नवंबर के महीने में दिशा निर्देश जारी किए गए थे। राज भवन शब्द में राजशाही और गुलामी की मानसिकता प्रतिनिधित्व होने के कारण देशभर के राज भवनों के नाम बदलकर लोक भवन किया जा रहा है। इसी प्रकार से उत्तर प्रदेश के राज भवन का नाम बदलकर भी लोक भवन होना चाहिए था, लेकिन वर्ष 2017 में नए मुख्यमंत्री सचिवालय भवन का नाम लोक भवन पहले से ही होने के कारण अब तक राज भवन के नए नाम को लेकर कवायद चल रही थी, क्योंकि लगभग सभी प्रदेश में यह बदलाव हो चुका था। केवल उत्तर प्रदेश में ही राज भवन का नाम नहीं बदला जा सका था। ऐसे में अब राज भवन का नाम बदलकर “जन भवन” कर दिया गया है।

                                                       

प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश के तहत राज्यपाल का आधिकारिक आवास तत्काल प्रभाव से सभी शासकीय कार्यों में जन भवन के नाम से ही संबोधित किया जाएगा। इसी के चलते राज भवन की आधिकारिक वेबसाइट पर नाम भी राज भवन को बदलकर “जन भवन” कर दिया गया है। अब तक 13 प्रदेशों और एक केंद्र शासित प्रदेश में राज भवन के नाम को बदलकर लोग भवन पहले ही रखा जा चुका है।

राजपाल के आधिकारिक आवासों के नामकरण के गृह मंत्रालय के निर्देश के अनुपालन में अब उत्तर प्रदेश राज भवन का नाम परिवर्तित होकर जन भवन किया जाना स्वागत योग कदम माना जा रहा है। कई दूसरे राज्यों में भी राज भवन को लोक भवन के नाम की ही की संज्ञा दी गई है, परन्तु उत्तर प्रदेश में क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय का नाम पहले से ही लोक भवन है इसलिए विकल्प के तौर पर इसका नाम जन भवन के रूप में नामांकन किया गया है। निश्चय ही ऐसी पहल से लोकतंत्र की भावना को बल मिल सकेगा। लाट साहब की उपनिवेशित संस्कृति के पोषक रहे गवर्नमेंट हाउस में ब्रिटिश शासन के दौरान गवर्नर रहा करते थे। बोलचाल में वायसराय की तरह उन्हें भी “लाट साहब” कहा जाता था। राज भवन में कहीं ना कहीं औपनिवेशिक कल के प्रति की ही प्रतिधुनिक हो रही थी। लोकतंत्र में जब शासन का भाव सेवा का है तो ऐसे प्रतिग्रह से मुक्ति आवश्यक ही है। राज भवन केवल एक संज्ञा ही नहीं भारत में दमनकारी औपनिवेशिक इतिहास का जीवंत प्रतीक भी था।

ऐसे प्रतीक से जनता और शासन के बीच खाई बनी रहती है। ऐसे में अब जब कि राज भवन जन भवन बन चुका है तो यह भवन दूरी का नहीं विश्वास का प्रतीक होगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है। जब जन भवन बनने का आशय यह कदापि नहीं होगा कि यहां की संवैधानिक मर्यादा कम होगी। कोशिश है कि जन भवन औपचारिकता से बाहर निकाल कर जनता से संवाद का नया आवास स्थापित करें, ताकि पहल केवल दिखावटी बनकर ही न रह जाए।