
कृषि विश्वविद्यालय एवं अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के बीच हुआ अनुबंध Publish Date : 09/12/2025
कृषि विश्वविद्यालय एवं अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के बीच हुआ अनुबंध
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं अंतराष्ट्रीय अर्ध शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजरा, मूंग और चना की बेहतर किस्म तलाशने के लिए एम ओ यू पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से कुलपति डॉक्टर के के सिंह एवं अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान हैदराबाद की तरफ से महानिदेशक डॉक्टर हिमांशु पाठक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
इस अनुबंध से कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिको को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध के क्षेत्र में और अधिक अच्छा कार्य करने के लिए मौका मिलगा। कुलपति डॉ के के सिंह ने बताया कि अब यहां के छात्र अब उच्च कोटि का अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद में जाकर शोध कर सकेंगे। वैज्ञानिक हैदराबाद के इस संस्थान में शोध के जरिए बाजरा, चना, मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसी फसलों की वैज्ञानिक एवं छात्र मिलकर बेहतर किस्म विकसित कर सकेंगे। वैज्ञानिक एवं छात्रों को प्रशिक्षण का मौका भी मिलेगा, इसके अलावा वैज्ञानिकों को छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली तथा जलवायु समर्थित तकनीक को भी विकसित करने में मदद मिलेगी।
"कृषि विश्वविद्यालय में अब बाजरा, चना, मूंग, उड़द और सोयाबीन की नई प्रजातियों को विकसित करने होगा काम"
-कुलपति के. के. सिंह
इसके साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के वैज्ञानिक भी कृषि विश्वविद्यालय में पहुंचकर यहां के शोध कार्यों की बारीकियो से आसानी से परिचित होंगे और वैज्ञानिकों को अनुसंधान में मदद कर सकेंगे।
कुलपति डॉक्टर के के सिंह ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संस्थान का लक्ष्य गरीबी और भूख को कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए कृषि को मजबूत बनाना है। इस समझौते के बाद कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय भी तेजी के साथ कार्य कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में कार्य कर रही है। संस्थान से अनुबंध होने पर किसानों को उपज में सहूलियत मिलेगी और इससे उनकी आय भी बढ़ सकेगी।

कुलपति डॉक्टर के के सिंह ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक निरंतर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं कि किस तरह किसानों को कम लागत में अधिक उपज प्राप्त हो सके। इस अनुबंध के बाद इस दिशा में और अधिक शोध कार्य हो सकेगा, जिसका लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को किसानो तक पहुंच सकेगा।
निदेशक शोध डा कमल खिलाड़ी ने बताया की विश्वविद्यालय द्वारा नई प्रजातियों को विकसित करने हेतु तथा नई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
प्रोफेसर आर एस सेंगर बताया कि कृषि विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के बीच जो अनुबंध हुआ है, इससे शिक्षक शोध के कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विश्वविद्यालय के छात्र एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान से जुड़ने के बाद उच्च कोटि का शोधकार्य कर सकेंगे।
