
स्वस्थ कृषि, स्वस्थ भविष्य: कीटनाशक जागरूकता पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित Publish Date : 01/12/2025
स्वस्थ कृषि, स्वस्थ भविष्य: कीटनाशक जागरूकता पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित कृषि विज्ञान, केंद्र हापुड़।
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ, के द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश से वित्त-पोषित परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हापुड़ में “कीटनाशकों के दुष्प्रभाव: कृषि से उपभोक्ता तक” विषय पर एक दिवसीय किसान कार्यशाला का आयोजन किया गया।
परियोजना से जुड़े वरिष्ठ मार्गदर्शक— डॉ. पी. के. सिंह (प्रसार निदेशक), डॉ. कमल खिलाड़ी (शोध निदेशक), प्रोफेसर आर. एस. सेंगर (निदेशक प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट) तथा डॉ. रविन्द्र कुमार (अधिष्ठाता, कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी), के सहयोग से कार्यशाला का संचालन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पुष्पेंद्र कुमार (प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, सूक्ष्मजीव एवं पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी विभाग), डॉ. राजेंद्र सिंह (प्रोफेसर, कीट विज्ञान विभाग), परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. रेखा दीक्षित (प्रोफेसर, सूक्ष्मजीव एवं पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी विभाग) और डॉ. अरविंद कुमार (प्रभारी, केवीके हापुड़) द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

स्वागत भाषण में डॉ. अरविंद कुमार (प्रभारी, केवीके हापुड़) ने किसानों को कीटनाशकों के दुष्प्रभाव, सुरक्षित उपयोग की विधियाँ और जैविक विकल्पों के महत्व से अवगत कराया।
डॉ. पुष्पेंद्र कुमार (प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, सूक्ष्मजीव एवं पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी विभाग), ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य फसलों में कीटनाशक अवशेषों का वैज्ञानिक विश्लेषण तथा मानव स्वास्थ्य पर इनके प्रभावों का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि उन्नत विश्लेषण तकनीकें, जैसे LC-MS/MS और GC-MS/MS, अवशेष विश्लेषण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. राजेंद्र सिंह (प्रोफेसर, कीट विज्ञान विभाग), ने रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से उत्पन्न पर्यावरणीय जोखिमों का उल्लेख करते हुए जैव-कीट नियंत्रण, आईपीएम और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक सिंह (केवीके हापुड़) ने कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, सुरक्षात्मक उपकरणों की अनिवार्यता तथा किसानों के लिए उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी।

परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. रेखा दीक्षित ( प्रोफेसर, सूक्ष्मजीव एवं पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी विभाग) ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को कीटनाशकों के दुष्प्रभावों, वैकल्पिक कृषि पद्धतियों और न्यूनतम रसायनों के उपयोग की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना है।
परियोजना की सह-अन्वेषक— डॉ. पंकज कुमार (प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, गन्ना अनुसंधान विभाग) तथा डॉ. नीलेश कपूर (सहायक प्रोफेसर, पादप जैव प्रौद्योगिकी विभाग) ने कार्यशाला के वैज्ञानिक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस दौरान शोध टीम के सदस्यों अनिरुद्ध यादव (शोध सहायक) तथा स्वप्निल श्रीवास्तव (शोध छात्र) ने किसानों के साथ तकनीकी संवाद स्थापित किया और फील्ड से जुड़े प्रश्नों के समाधान में सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला के अंत में सहभागी किसानों को प्रशिक्षण किट एवं प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने किसानों से रासायनिक कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।
