तीव्र गति से बढ़ता ई-वेस्ट      Publish Date : 30/10/2025

                        तीव्र गति से बढ़ता ई-वेस्ट

ई-कचरा पर्यावरण और मानव दोनों के लिए ही होता है घातक

धरती की गोद में चमकते स्क्रीन अब जहर बनते जा रहे हैं। प्रत्येक घर, दफ्तर और हर जेब मौजूद मोबाइल, लैपटॉप और उनके चर्जर आदि जो कभी आधुनिकता का प्रतीक समझे जाते थे, वह अब हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।

वर्तमान में दुनिया अब तेजी से उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ तकनीक की चमक के पीछे छोड़े गए इलेक्ट्रनिक कचरे का अंधेरा फैलता जा रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2025 तक के लिए यह वैशिवक आहवान है कि अपना ई-कचरा रीसाइकिल करें, क्योंकि यह अत्यंत आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट जनरल ई-वेस्ट मॉनिटर के अनुसार साल 2024 के अंत तक विश्व में लगभग 38 अरब किलोग्राम ई-कचरा उत्पन्न हुआ था। अनुमान है कि ई-कचरे की यह मात्रा वर्ष 2030 तक बढ़कर 82 अरब किलोग्राम तक पहुँच जाएगी अर्थात आगे आने वाले कुछ वर्षों में धरती पर इलेक्ट्रॉनिक अवशेष का बोझ लगभग 32 प्रतिशत तक और बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ई-वेस्ट की दर अब औपचारिक रूप से एकत्र किए जाने वाले कचरे से लगभग 5 गुना तेज है।

                                                            

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने इसे दुनिया के सबसे अधिक जटिल और खतरनाक कचरा प्रवाहों में से एक बताया है। भारत अब ई-वेस्ट के उत्पादन में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादक देश बन चुका है।