
गन्ना प्रजाति को0-0238 को बचाने का अभियान Publish Date : 09/07/2026
गन्ना प्रजाति को0-0238 को बचाने का अभियान
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
प्रिय किसान भाईयों,
हम आपको समस-समय पर यह बताते आ रहे हैं कि प्रत्येक फसल प्रजाति की एक उम्र होती है एवं उसके बाद उस प्रजाति के आनुवांशिक गुणों में कमी होने लगती है और इसके चलते इस प्रजाति से उत्पादन कम मिलने लगता है। इसी प्रकार से उस प्रजाति की प्रतिरोधक क्षमता के कम हो जाने के कारण कीट एवं रोगों का आपतन अधिक होने लगता है। अब ऐसा ही कुछ गन्ने की प्रजाति को0-0238 के साथ भी हो रहा है। इससे पूर्व के अनुभव भी यही बताते हैं कि अपने समयकाल में गन्ने की प्रजाति को0 शा0 1148, को0 जे0 64 अथवा को0 शा0 767 इत्यादि महत्वपूर्ण प्रजातियाँ भी धीर-धीरे रोग से ग्रसित होती चली गई और इनकी उपज में कमी आ जाने के कारण किसान भाईयों को इन प्रजातियों की खेती को अन्ततः छोडना ही पड़ा।

कुछ समय पूर्व की बात करें तो गन्ने की खेती और गन्ना प्रजाति को0-0238 एक दूसरे का प्रयाय बन चुके थे। काफी अच्छी पैदावार देने के चलते गन्ने की यह प्रजाति किसनों की पहली पंसद बन चुकी है और निश्चित् रूप से इससे प्राप्त होने वाला लाभ भी किसानों को मिल रहा है। लाभ के इसी आंकड़े को देखकर ही अधिकाँश किसान भाई अपने शत-प्रतिशत क्षेत्र पर गन्ने की इसी प्रजाति की खेती करने को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में इसकी अच्छी पैदावार और इससे मिलने वाले सीधे आर्थिक लाभ को देखकर आपको यह अच्छा भी लग रहा होगा, परन्तु सम्पूर्ण गन्ना क्षेत्र पर गन्ने की केवल एक ही प्रजाति की खेती करना एक गम्भीर संकट की ओर संकेत भी दे रहा है।
हमारे पूर्व के अनुभव एवं वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार किसी एक ही क्षेत्र में केवल एक ही गन्ने की प्रजाति की खेती करने से उस प्रजाति में रोग और कीटों के प्रकोप होने की सम्भावना काफी हद तक बढ़ जाती है और यदि ऐसा होता है तो अन्य वैकल्पिक प्रजातियों का बीज उपलब्ध नहीं होने के कारण किसान भाईयों को काफी अधिक आर्थिक नुकसान का समाना करना पड़ता है।
वर्तमान समय में किसान भाईयों को गन्ने की खेती करने के दौरान अत्यंत सजगता की आवश्यकता है, क्योंकि मध्य एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गन्ने की प्रजाति को0-0238 पर विभिन्न रोगों का आपतन होना प्रारम्भ हो चुका है, जिनमें से लाल सड़न (रेड रॉट) एक अत्याधिक हानिकारक और लाइलाज रोग है और इसी के चलते इस रोग को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। पूर्व में को0 शा0 1148 और को0 जे0 64 के जैसी गन्ने की महत्वपूर्ण प्रजातियाँ भी इसी रोग के चलते समाप्त हो चुकी हैं। हालांकि, गन्ने की प्रजाति को0 0238 में यह रोग अभी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही है, ऐसे में यदि किसान भाई अपनी गन्ना खेती के दौरान कुछ मूलभूत सवाधानियाँ अपनाएं तो अभी गन्ने की इस प्रजाति को बताया जा सकता है और साथ ही इस प्रजाति की उम्र को भी बढ़ाया जा सकता है।
किसानों को क्या करना चाहिए?

किसान भाईयों, अभी तक लाल सड़न (रेड रॉट) का नियंत्रण करने के लिए किसी दवा का विकास नहीं हो पाया है, इसलिए गन्ने की खेती को लाभदायक बनाए रखने के लिए आपको तीन प्रमुख बिन्दुओं पर कार्य करने की आवश्यकता होगी जैसे-
1. लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के पाए जाने पर उसकी रोकथाम के लिए प्रभावी रोकथाम करें।
2. को0-0238 प्रजाति की बुवई करने के लिए स्वस्थ एवं शुद्व गन्ना बीज हेतु बीज नर्सरी का उपयोग करें।
3. कम से कम 25 प्रतिशत क्षेत्रफल पर वैकल्पिक गन्ना प्रजातियों की बुवाई करें। सम्पूर्ण क्षेत्रफल पर केवल को0 0238 प्रजाति की ही बुवाई करने से बचे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
