गन्ने की नई प्रजाति सीओएच-191, जो देती है 700 क्विंटल प्रति      Publish Date : 07/07/2026

गन्ने की नई प्रजाति सीओएच-191, जो देती है 700 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन

                                                                                             प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

  • गन्ने की एक ऐसी वैरायटी जो करती है हवा से बातें, परन्तु हवा का खोफ नहीं है।

गन्ने की नई प्रजाति सीओएच-191 मुख्य रूप से एक ऐसी वैरायटी है जो हवा से बातें तो करती है, लेकिन उसे हवा से किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा दावा किया जा रहा है कि यह प्रजाति 700 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उत्पादन देने में भी साक्षम है। हरियाणा कृषि मेले के दौरान प्रदर्शित की गई गन्ने की यह किस्म किसानों को भी अपनी ओर खूब आकर्षित कर रही है।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा विकसित की गई सीओएच-191 गन्ने की एक अगेती किस्म है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस किस्म से चीनी की रिकवरी में भी एक से दो प्रतिशत तक की वृद्वि होगी। इसके साथ ही अच्छी तरह से बुवाई करने के बाद बरसात और हवा के चलते इस किस्म की फसल गिरती नहीं है।

                                          

लाडवा अनाज मंडी में चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यलय, हिसार के सहायक वैज्ञानिक डॉ0 सुधीर शर्मा ने क्षेत्रीय निदेशक डॉ0 मेहर चंद की निगरानी में विकसित की गई गन्ने की अगेती किस्म सीओएच-191 का प्रदर्शन कृषि विकास मेले में किया गया। इस किस्म के गुणों को देखकर किसान काफी उत्साहित हैं। चूंकि लाडवा क्षेत्र में गन्ने का उत्पादन प्रमुख रूप से किया जाता है, ऐसे में वहां के किसान भी इस किस्म के प्रति काफी उत्साह दिखा रहे हैं और कृषि वैज्ञानिकों से इस किस्म के सम्बन्ध में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

किसानों की आय होगी दोगुनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह किस्म किसानों की आय को दोगुना करने में सक्षम होगी। क्षेत्रीय निदेशक डॉ0 मेहर चंद एवं शोधकर्ता और सहायक कृषि वैज्ञानिक डॉ0 सुधीर शर्मा ने विशेष बातचीत के दौरान बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से गन्ने की नई अगेती प्रजाति सीओएच-191 का विकास किया गया है। गन्ने की यह नई किस्म हरियाणा में सबसे अधिक उगायी जाने वाली गन्ने की किस्म 238 से भी अधिक अच्छी और भरोसेमंद है।

इस नई वैरायटी की औसत उपज 550 से 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक मिलेगी और किसान यदि इस किस्म की अच्छे तरीके से देखभाल करता है तो इससे प्रति एकड़ 700 क्विंटल तक की उपज भी प्राप्त कर सकता है। इस वैरायटी की सबसे अच्छी बात यह है कि एक बार अच्छे तरीके से बीज की बुवाई करने के बाद इस किस्म का गन्ना बरसात या हवा में रिता नहीं है।

250 किसानों ने की है इसकी बुवाई, एक स्प्रे से ही चलेगा काम

                                   

विशेष बातचीत के दौरान डॉ0 मेहर चंद ने बताया कि गन्ने की इस वैरायटी से बनाई जाने वाली चीनी में भी एक से दो प्रतिशत तक की वृद्वि होगी। नव विकसित इस प्रजाति को किसानों तक पहुँचाने का कार्य भी जल्द ही शुरू किया जाऐगा, हालांकि इस प्रजाति के परिणाम जानने के लिए प्रदेश के 250 को इसका बीज वितरित किया जा चुका है। इस किस्म की यह भी एक विशेषता है कि जहाँ पहले की फसलों में तीन बार स्प्रे किया जाता था वहीं इस किस्म में केवल एक बार स्प्रे करना ही पर्याप्त रहेगा। इसके साथ ही यह किस्म रोग प्रतिरोधी गुण भी रखती है जिससे इसमें रोग भी नहीं लगते हैं। अतः इस वैरायटी की बुवाई कर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। इस वैरायटी का प्रयोग करने से पानी की बचत के साथ ही लाल सड़न जैसे रोगों से मुक्ति भी मिलती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।