
सोयाबीन की टॉप-3 हाई यील्ड किस्में और उनकी विशेषताएं Publish Date : 13/06/2026
सोयाबीन की टॉप-3 हाई यील्ड किस्में और उनकी विशेषताएं
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
सोयाबीन की खेती के दौरान अधिकतर किसान भाई को खरीफ सीजन की ऐसी फसलों की तलाश में रहते है, जो रोग प्रतिरोधक हो और किसान इन फसलों की खेती कर अधिक से अधिक उपज भी प्राप्त कर सकें। ऐसे में किसानों के लिए सोयाबीन की ये टॉप-3 किस्में मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है। आज के अपने इस लेख में हम इन किस्मों से कितनी मिलेगी पैदावार और क्या है इन किस्मों की विशेषताएं सबकुछ विस्तार से बताने जा रहे हैं।
अब खरीफ सीजन की शुरुआत पूरे देश हो चुकी है और ऐसे में किसान भाइयों को तलाश है ऐसी उन्नत किस्मों की जिससे उन्हें इन फसलों से अधिक उत्पादन मिल सकें और साथ ही बाजारों में भी उनके उत्पाद की अच्छी कीमत मिल सके। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) द्वारा विकसित सोयाबीन की ये टॉप-3 किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभरकर सामने आई हैं। इन किस्मों में उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधकता और कम अवधि में पकने जैसी विशेषताएं शामिल हैं। ऐसे में यदि किसान सोयाबीन की इन तीन प्रमुख उन्नत किस्मों की खेती करते हैं तो वह सोयाबीन का बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोयाबीन की इन तीनों किस्मों का विवरण इस प्रकार से है-
पूसा सोयाबीन 12

पूसा सोयाबीन 12 नामक सोयाबीन की किस्म को वर्ष 2015 में विकसित किया गया था। अगर किसान भाई इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह इस किस्म से 128 दिनों के भीतर सिंचित परिस्थितियों में किसान लगभग 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही यह किस्म मुख्य रूप से उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित की गई है. सिंचित परिस्थितियों में इसकी औसत उत्पादन क्षमता लगभग 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।
किस्म की प्रमुख विशेषताए
इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस और राइजोक्टोनिया ब्लाइट जैसे सोयाबीन के प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी होती है। इसकी फसल लगभग 128 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। बेहतर उत्पादन और रोगों से सुरक्षा के कारण यह किस्म किसानों के लिए योयाबीन का एक अति लाभकारी विकल्प मानी जाती है।
पूसा सोयाबीन 9712
यदि किसान भाई पूसा सोयाबीन 9712 किस्म का चुनाव करते हैं तो यह उनके लिए एकदम सही विकल्प साबित हो सकती है। साथ ही यह किस्म किसानों के बीच इसलिए भी अधिक लोकप्रिय है, क्योंकि किसान इस किस्म से सिंचित परिस्थितियों में औसत उपज लगभग 22.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्रदान करती हैं।
किस्म की प्रमुख विशेषताए
इस बार के खरीफ सीजन में किसान भाई अगर इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह इससे लगभग 115 दिनों में इससे उपज प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही सोयबीन की इस किस्म की विशेषता यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को रोग प्रबंधन पर कम खर्च करना पड़ता है, जिससे किसानों की मुनाफे की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
पूसा सोयाबीन 6

पूसा सोयाबीन 6 वर्ष 2021 विकसित किस्म है और यह किस्म किसानों के लिए आधुनिक और उन्नत विकल्पों में से एक है। अगर इन क्षेत्रों दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के किसान इस खरीफ सीजन इस किस्म की बुवाई करते है तो वह कम समय में इस किस्म से अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कहने का अर्थ है कि इस किस्म की बुवाई करने वाले किसान 116 दिनों में लगभग 21.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन इस किस्म से प्राप्त कर सकते हैं।
किस्म की प्रमुख विशेषताएं
इस किस्म की विशेषता यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस, राइजोक्टोनिया ब्लाइट और बैक्टीरियल पस्ट्यूल जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। इसके अलावा यह स्टेम फ्लाई और डिफोलिएटर्स जैसे कीटों के प्रति भी मध्यम प्रतिरोध का प्रदर्शन करती है। इसके दानों का रंग पीला होता है और इसमें लगभग 20.7 प्रतिशत तेल पाया जाता है, जिसके चलते इस किस्म को प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी बेहद उपयुक्त माना जाता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
