गन्ने की प्रजाति को0-0238 को बचाने का अभियान      Publish Date : 16/05/2026

गन्ने की प्रजाति को0-0238 को बचाने का अभियान

                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी  

प्रिय किसान भाइयो, को० 0238 प्रजाति को बचाने का है अभियान किसान भाइयो सावधान-सावधान-सावधान। हम आपको समय-समय पर बताते आ रहे हैं कि प्रत्येक गन्ना प्रजाति की एक उम्र होती है एवं उसके पश्चात उस गन्ना प्रजाति में अनुवांशिक ह्रास होने लगता है। जिसके कारण पैदावार कम होने लगती है एवं उसकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने के कारण उस गन्ना प्रजाति पर कीट एवं रोगों का आपतन भी बढ़ने लगता है।

हमारे पूर्व अनुभव भी यही बताते हैं कि अपने समयकाल में को0 शा0 1148, को0 जे0 64 अथवा को० शा0 767 इत्यादि महत्वपूर्ण गन्ना प्रजातियां धीरे धीरे रोग ग्रस्त होती चली गई एवं पैदावार में कमी आ जाने के कारण किसान भाइयों को इन प्रजातियों की खेती करना छोड़ना पड़ा।

विगत कुछ वर्षों से गन्ना खेती एवं को0-0238 गन्ना प्रजाति एक दूसरे का पर्याय बन गए हैं। अच्छी पैदावार देने की विशेषता के चलते यह गन्ना प्रजाति गन्ना किसानों की पहली पसंद बन गयी है एवं निश्चित रूप से इसका आर्थिक लाभ गन्ना किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। इसी लाभ के चलते यह देखने में आ रहा है कि अधिकांश किसान भाई अपने शत प्रतिशत गन्ना क्षेत्रफल में केवल को0 0238 प्रजाति की ही खेती कर रहे हैं। वर्तमान में अच्छी पैदावार एवं इसके मिलने वाले सीधे आर्थिक लाभ के कारण आपको यह अच्छा लग रहा होगा। परन्तु सम्पूर्ण क्षेत्रफल में केवल एक ही गन्ना प्रजाति का होना एक गंभीर संकट की ओर इशारा भी कर रहा है। हमारे पूर्व अनुभव एवं वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में केवल एक ही गन्ना प्रजाति की खेती होने से उस प्रजाति में रोग अथवा कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है एवं यदि ऐसा होता है तो अन्य वैकल्पिक प्रजातियों का बीज उपलब्ध ना होने के कारण किसान भाइयों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

                                          

वर्तमान समय में किसान भाइयों को गन्ना खेती में अत्यंत सजगता की आवश्यकता है क्योंकि मध्य एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में को0 0238 गन्ना प्रजाति में विभिन्न रोगों का आपतन प्रारम्भ हो गया है जिसमें लाल सड़न रोग (रेड रॉट) अत्यधिक हानिकारक एवं लाइलाज रोग है एवं इसी कारण इसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। को० शा0 1148 एवं को0 जे0 64 प्रजातियां इसी रोग के कारण समाप्त हो गयी थीं। यद्यपि को० 0238 गन्ना प्रजाति में यह रोग अभी प्रारम्भिक अवस्था में है ऐसे में अपनी गन्ना खेती में यदि हम कुछ मूलभूत सावधानियां रखें तो अभी इस गन्ना प्रजाति को बचाया जा सकता है तथा इसकी उम्र को बढ़ाया जा सकता है।

ऐसे में क्या करें?

किसान भाइयों, लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के नियंत्रण के लिए के लिए अभी तक कोई दवाई विकसित नहीं हो पाई है इसीलिए अपनी गन्ना खेती को लाभदायक बनाये रखने के लिए आपको तीन मुख्य बिंदुओं पर कार्य करने की विशेष रूप से आवश्यकता हैः

1. लाल सड़न रोग पाए जाने पर उसके रोकथाम के उचित उपाय करें।

2. को0 0238 की बुवाई के लिए स्वस्थ व शुद्ध गन्ना बीज हेतु बीज नर्सरी लगाएं।

3. कम से कम 25 प्रतिशत गन्ना क्षेत्रफल में वैकल्पिक गन्ना प्रजातियों की बुवाई करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।