गन्ने की नई और शानदार किस्म: Co 12221 (करण-12)      Publish Date : 20/03/2026

गन्ने की नई और शानदार किस्म: Co 12221 (करण-12)

                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

किसान भाइयों, आज हम बात करेंगे गन्ने की एक ऐसी किस्म के बारे में जो आज के समय में 0238 (Co 0238) का एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है। इस किस्म का नाम है Co 12221, जिसे पंतनगर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किया गया है।

क्यों खास है Co 12221?

                            

इस किस्म को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत (हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी यूपी) के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और शानदार वजन है।

प्रमुख विशेषताएं:

1. अगेती किस्म: यह एक जल्दी पकने वाली किस्म है। इसकी चीनी की मात्रा  लगभग 18-19% तक रहती है, जिससे मिलों में इसकी मांग अधिक रहती है।

2. मजबूत और ठोस गन्ना: इसका गन्ना अंदर से ठोस होता है और मध्यम से अधिक मोटा होता है। ठोस होने के कारण प्रति गन्ना वजन बहुत अच्छा निकलता है।

3. बीमारियों से सुरक्षा: पिछले कुछ समय में 0238 किस्म में 'लाल सड़न' (Red Rot) की समस्या बढ़ी है, लेकिन Co 12221 इस बीमारी के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है। साथ ही, इसमें कीटों का हमला भी कम देखा गया है।

4. गिरने की समस्या कम: इसका तना काफी मजबूत होता है, जिससे तेज हवाओं में फसल के गिरने का खतरा कम रहता है।

5. पैदावार: अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए, तो यह किस्म 850 से 950 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार देने की क्षमता रखती है।

बुवाई और खाद प्रबंधन:

                             

* बुवाई का समय: इसे शरद कालीन और बसंत कालीन दोनों मौसमों में बोया जा सकता है।

* बेसल डोज: बुवाई के समय संतुलित मात्रा में DAP, पोटाश और जिंक का प्रयोग करें। (अपनी मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद डालें)।

* सिंचाई: इसे मध्यम सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन गन्ने की मोटाई के समय नमी बनाए रखना जरूरी है।

किसान भाइयों, क्या आपने अपने खेतों में Co 12221 लगाई है? अपना अनुभव नीचे कमेंट में जरूर बताएं!

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।