जौ की नव-विकसित किस्म “Hulless Barley”      Publish Date : 18/12/2025

           जौ की नव-विकसित किस्म “Hulless Barley”

                                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

(Hulless Barley), एक विशेष प्रकार का जौ (Barley) होता है, जिसके दानों पर छिलका नहीं होता और यह यही वह कारण है जो इसे दलिया, चपाती और पूड़ी आदि बनाने के लिए बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है, विशेष रूप से स्वास्थ्य लाभ के लिए, क्योंकि इसमें बीटा-ग्लूकन मौजूद होता है और यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। हाल ही में, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों ने DWRB 223 जैसी जौ की नई किस्में विकसित की हैं।

मुख्य बिंदुः

                                                             

क्या है? यह एक ऐसी जौ की किस्म है जिसके ऊपर कोई छिलका नहीं होता है, जो इसे आसानी से पकाने और खाने योग्य बना देता है।

प्राप्त होने वाले लाभः

  • आंतों के स्वास्थ्य को ठीक करता है (लीकी गट सिंड्रोम में) और पाचन में व्यापक सुधार करता है।
  • इसमें बीटा-ग्लूकन मौजूद होता है, जो एक घुलनशील फाइबर होता है और स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
  • इसे गेहूं के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है, विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए जिन्हें गेहूं से एलर्जी होती है।
  • यह खाने में बहत स्वादिष्ट होता है और इसे चावल या क्विनोआ की तरह खाया जा सकता है, या सलाद के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

उपयोगः

  • दलियाः इस जौ से बनाया गया दलिया सबसे स्वादिष्ट दलिया माना जाता है।
  • चपाती (रोटी) और पूड़ियाँ बनाकर खाई जा सकती हैं।
  • चावल की जगह या सलाद के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

किस्में: DWRB 223 एक नई विकसित किस्म है जो दलिया बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है और इसे उगाना भी काफी आसान होता है।

DWRB 223 किस्म के गुण संक्षेप में, ‘‘बिना छिलके वाला जौ’’ एक स्वास्थ्यवर्धक अनाज है, जिसे आसानी से खाया जा सकता है और यह गेहूं का एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प हो सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।