
‘‘विज्ञान आधारित कृषि - खुशहाल किसान‘‘किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन Publish Date : 03/11/2026
‘‘विज्ञान आधारित कृषि - खुशहाल किसान‘‘किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन
-
कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन
-
डा0 एम0के0 शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव, कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, - किसान एवं वैज्ञानिकों और तकनीकी ज्ञान से बढा कृषि उत्पादन
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी “कृषि कुम्भ” के द्वितीय दिन को किसान मेला परिसर में किसान मेला एवं मण्डलीय रबी गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि, डा0 एम0 के0 शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव, कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया। उदघाटन समारोह में निदेशक, कृषि विभाग, उ0 प्र0 सरकार भी उपस्थित रहे।

मेले का उद्घाटन करने के उपरान्त मुख्य पण्डाल में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डा0 एम0 के0 शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव, कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, उत्तर प्रदेश ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसान मेले ने देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आये किसानों और उद्यमियों को कृषि वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करने का और अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को बाँटने का एक अवसर प्रदान किया है। उन्होने किसानो को बताया कि वर्ष 2026 अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिसका मुख्य उदेदश्य ग्रामीण महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देना, सफल पद्धतियों को साझा करने की सुविधा प्रदान करना और विकसित भारत की दिशा में एक उत्पादक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र के निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, डा0 त्रिवेणी दत्त ने सम्बोधित करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक लगातार किसानों के साथ मिलकर उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण एवं विपणन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे है। उन्नत बीज उत्पादन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा 7000 कुन्तल बीज किसानों को उपलब्ध कराया गया है। ‘‘विज्ञान आधारित कृषि - खुशहाल किसान‘‘ के इस अभियान में विश्वविद्यालय सदैव प्रयासरत है कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित न रहे, बल्कि विज्ञान, नवाचार, तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं बाजार से जुड़कर किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कार्यक्षेत्र के 18 जनपदों में 20 कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा 104 कृषक उत्पादन संगठनों के 56000 से अधिक सदस्यों को तकनीकी प्रदान की जा रही हैं। जिसमें 68 कृषक उत्पादक संगठन (FPO) लाइंसेन्स धारक है तथा 05 कृषक उत्पादक संगठनों द्वारा विदेशों में भी उत्पाद को निर्यात किया जा रहा है।
निदेशक प्रसार, डा0 सतेन्द्र कुमार ने बताया कि किसान मेला के दूसरे दिन भारी संख्या में किसानों एवं स्कूली छात्रों ने किसान मेला भ्रमण किया। किसान मेले का भ्रमण कर नवीनतम तकनीकी जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, समस्त अधिष्ठातागण, निदेशकगण एवं प्रसार निदेशालय स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।
मेले में हुआ किसान गोष्ठी एवं चौपाल का आयोजन

मेले में दूसरे दिन मुख्य पंडाल में किसान गोष्ठी एवं चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों द्वारा रबी फसलों की उन्नत प्रजातियों एवं बीज उत्पादन डा0 लोकेश गंगवार, रबी फसलों में खरपतवार नियंत्रण डा0 राजेश कुमार, मृदा स्वास्थ्य एवं केंचुआ पालन डा0 एस0 पी0 सिंह, गन्ने की खेती में टपक सिंचाई पद्धति के लाभ डा0 चित्रा शुक्ला, गन्ने की फसल में कीट प्रबंधन डा0 गजे सिंह आदि विषयों पर वैज्ञानिकों द्वारा व्याख्यान दिए गए। इस दौरान क्रिस्टल फॉस्फेट कम्पनी द्वारा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता डा0 पी0के0 पाण्डेय द्वारा आयोजित की गई तथा विजयी किसानों किसानों को पुरस्कृत किया गया।
प्रमुख सचिव ने कुलपति के साथ, निदेशकों, अधिष्ठाताओं, विभागध्यक्षों के साथ किया संवाद
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में डा0 एम0के0 शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव, कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, उत्तर प्रदेश ने कुलपति सभागार कुलपति डा0 त्रिवेणी दत्त की उपस्थिति में निदेशकों, अधिष्ठाताओं, विभागध्यक्षों के साथ संवाद किया तथा शिक्षा, शोध एवं प्रसार की गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान कुलपति डा0 त्रिवेणी दत्त ने विश्वविद्यालय में किये जा रहे कार्यो एवं आगामी कार्ययोजना के बारे में चर्चा की। इस अवसर पर डा0 एम0के0 शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव ने सम्बोधित करते हुये कहा कि वर्ष 1965 में भारत में हरित क्रांति का उदय होने के उपरान्त पीली क्रांति, सफेद क्राति एवं नीली क्रांति आयी जिससे भारत में खाद्यान्न सुरक्षा को बल मिला। उन्होंने कहा कि 1947 में खाद्यान्न उत्पादन 50 मिलियन टन था जो अब बढकर 376 मिलियन टन पहुँच गया। आगामी वर्षो में इसके ओर आगे बढने की उम्मीद हैं। उत्तर प्रदेश का ही खाद्यान्न उत्पादन 74 मिलियन टन होता है जिसमें अभी ओर अधिक वृद्धि होगी। हमें खेत बचाओ अभियान पर ध्यान देना होगा। साथ ही मृदा में कार्बन की मात्रा को बढाने के लिए तकनीकी विकसित करनी होगी और इसके लिए दलहनी फसलों ढैंचा, हरी खाद इनका समावेश खेती में करना होगा, जिससे मृदा में कार्बन की मात्रा बढ सकें। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो धीरे धीरे खेती बंजर भूमि में परिवर्तित हो जाएगी इसलिए अभी सचेत रहना होगा और तकनीकों के माध्यम से मृदा में कार्बन की मात्रा को बढाना होगा। उन्होंने बताया दिसम्बर में कार्बन कन्टेंट को लेकर लखनऊ में एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है जिससे वैज्ञानिक, शोध छात्र एवं किसान लाभान्वित हो सकेगे।