
बीज खेती का पुरातन आधार Publish Date : 02/09/2026
बीज खेती का पुरातन आधार
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बीज खेती का पुरातन आधार है लेकिन वर्तमान में खतरे में है बीज !
बीज के बिना खेती नहीं होगी। दुनिया भर के लोग इसे समझते हैं। बीजों की रक्षा करना और उन तक पहुंच प्रदान करना एक मौलिक धारणा है जो संस्कृतियों, विचारधाराओं, धर्मों और विश्व दृष्टिकोण से परे है।
यह विचार कि बीजों का स्वतंत्र रूप से प्रसार होना चाहिए, इतना गहरा है कि 1960 तक मौजूद सभी राष्ट्रीय बीज प्रणालियाँ इस आधार पर बनाई गई थीं कि संग्रहित बीज अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध होने चाहिए।
बीजों का आदान-प्रदान हमारी सांस्कृतिक पहचान भी है । केवल पचास या साठ साल पहले तक, इन स्वतंत्रताओं को प्रतिबंधित करने के किसी भी प्रयास को बेतुका, एक अस्वीकार्य हमला माना जाता था, जो सभ्य सह-अस्तित्व के बुनियादी मानदंडों को तोड़ता था। आज विभिन्न बीजो पर एकाधिकार की होड लगी है| किसान इस षड़यंत्र को समझे और अपने बीजो को संरक्षित करे| आज अपने बीज से बीज न बनाना भी हमारी एक भारी भूल है!!
