
लगातार चीनी की बढ़ती कीमतें Publish Date : 23/08/2026
लगातार चीनी की बढ़ती कीमतें
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चीनी दाम 7 साल के उच्चतम स्तर पर।
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निर्यात पर रोक के उपरांत गन्ने का रकबा कम होने और एथनॉल नीति से कम उत्पादन ने बदला चीनी बाजार का स्वरूप।
कोरोना काल के बाद से स्थिर चल रही चीनी की कीमतों में अब वृद्वि देखी जा रही है। जुलाई के महीने में मिलों से थोक में बिकने वाली चीनी के भाव लगभग 4,400 रूपए प्रति क्विंटल तक पहुँच गया है, जो कि पिछले सात वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। इससे पहले चीनी का एक्स फक्ट्री मूल्य 3,900 से 4,100 रूपए के बीच ही बना हुआ था और यह स्थिति जब है, जबकि केन्द्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगाई हुई है। चीनी के मूल्यों में इस वृद्वि ने गन्ना अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से केन्द्र में लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसे में चुनावी वर्ष होने के चलते प्रदेश के किसानों में अगले वर्ष गन्ने के दामों में भी वृद्वि होने की उम्मीद जगी है।
कोरोना काल के दौरान गन्ने का रकबा और उत्पादन दोनों में ही वृद्वि हुई थी, जिसके कारण चीनी के स्टॉक में बढ़ोत्तरी होने से चीनी की कीमतों में गिरावट आई थी। अब कम उत्पादन, सीमित स्टॉक और एथनॉल डायवर्जन के चलते चीनी की कीमतों में उछाल आया है। गन्ने के रकबे के कम होने का सीधा प्रभाव चीनी के उत्पादन पर पड़ा है। सामान्य तौर पर निर्यात पर पाबंदी लगने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ती है, परन्तु उत्पादन में कमी और कम होते स्टॉक ने इसके विपरीत काम किया है। पिछले कुछ वर्षों में चीनी मिलों ने अतिरिक्त स्टॉक से पार पाने के लिए एथनॉल के उत्पादन पर खासा जोर दिया था, इन हालातों में अब इसी रणनीति ने घरेलू बाजार के समीकरणों को बदल दिया है।
चीनी के फुटकर बाजारों में भी है बढ़ोत्तरी का असर
थोक बाजार में होने वाली इस तेजी का असर खुदरा बाजार पर दिखाई दे रहा है। अब बाजारों में चीनी का भाव 65 रूपये प्रति किलोग्राम अथवा इससे ऊपर भी चल रहा है। मेरठ मंडी में चीनी के थोक भाव 5,500 रूपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। हालांकि, कुल खपत में आम उपभोक्ता की हिस्सेदारी छह प्रतिशत से भी कम होने के कारण इसका व्यापक प्रभाव सीमित ही रहने की सम्भावना है।
चीनी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्वि नहीं होती और एथनॉल की मांग बनी रहती है तो आने वाले महीनों में चीनी के एक्स-फैक्ट्री दाम 5,500 रूपए प्रति क्विंटल तक भी पहुँच सकते हैं। पैदावार में कमी के साथ ही साथ किसानों ने इस बार कोल्हुओं पर भी अपेक्षाकृत अधिक गन्ना बेचा है, जिसके चलते चीनी मिलों में पेराई कम हुई और इसके फलस्वरूप चीनी का उत्पादन भी कम हुआ है और कमोबेश यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखी जा रही है।
किसानों को भी है गन्ने के मूल्य में बढ़ोत्तरी की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में चुनावी वर्ष में चीनी की कीमतों में आने वाली इस तेजी के कारण किसानों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। भाकियू (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह कहते हैं कि यदि चीनी के दाम अच्छे हैं तो इसका अर्थ यह है कि चीनी मिलें भी लाभ की स्थिति में है। ऐसे में सरकार को गन्ने का भाव भी ऐसा तय करना चाहिए कि किसान उत्साह के साथ गन्ने की खेती कर सकें। वहीं बिजनौर चीनी मिल यूनिट हेड रविन्द्र शुक्ला का मानना है कि लागत के मुकाबले अभी ओर अधिक सुधार करने की आवश्यकता है।
